कोलकाता. राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (सीइओ) मनोज अग्रवाल ने मंगलवार को कहा कि सात सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (एइआरओ)का निलंबन नियमों के तहत ही हुआ है. सब कुछ नियम के तहत हुआ है और आगे भी होगा. किसी को कुछ भी करने की छूट नहीं है. उन्होंने कहा कि सातों एइआरओ ने एसआइआर गाइडलाइंस का उल्लंघन किया है. निलंबित हुए सातों अधिकारियों को माइक्रो ऑब्जर्वर और ऑब्जर्वर ने गड़बड़ी नहीं करने की चेतावनी भी दी थी, लेकिन वे नहीं माने. निलंबन हटाने या सजा कम करने के लिए राज्य सरकार को चुनाव आयोग से बात करनी होगा. इस मामले में दूसरा कोई विकल्प नहीं है. गौरतलब है कि निर्वाचन आयोग ने चुनाव संबंधी विधिक प्रावधान के तहत एइआरओ के रूप में कार्यरत सात अधिकारियों को कर्तव्य में लापरवाही और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) से जुड़े वैधानिक अधिकारों के दुरुपयोग के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित किया था. आयोग की इस सख्ती के बाद फिर से राज्य सरकार और आयोग के बीच ठन गयी है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आयोग के इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए सात अधिकारियों के पास खड़े होने का भरोसा दिया है.
उधर, मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती ने आयोग से डेटा अपलोड करने की डेडलाइन बढ़ाने की अपील की है. जानकारी के अनुसार, सोमवार तक करीब 50 हजार मतदाता अयोग्य साबित हुए हैं. अब तक कुल मिलाकर दो लाख आठ हजार 870 वोटरों को आयोग ने आयोग्य करार दिया है. नतीजतन, अंतिम मतदाता सूची से 65 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाये जाने की प्रबल संभावना है. उल्लेखनीय है कि 14 फरवरी को सुनवाई प्रकिया खत्म हो गयी है. अब दस्तावेजों की जांच हो रही है. 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी.
