सुप्रीम कोर्ट का सवाल, यूएपीए लगाने का आधार बनता है?

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कलकत्ता हाइकोर्ट से पूछा कि वह राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) द्वारा गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) लागू किये जाने के औचित्य की जांच करे.

नेता प्रतिपक्ष के काफिले पर हमले का मामला

संवाददाता, कोलकातासुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कलकत्ता हाइकोर्ट से पूछा कि वह राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) द्वारा गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) लागू किये जाने के औचित्य की जांच करे. यह मामला राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के काफिले पर 10 जनवरी को हुए हमले से जुड़ा है. सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जयमाल्य बागची की पीठ ने निर्देश दिया कि एनआइए इस मामले में अपनी जांच से संबंधित सामग्री कलकत्ता हाइकोर्ट के समक्ष सीलबंद लिफाफे में पेश करे, ताकि यह तय किया जा सके कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यूएपीए के तहत जांच का प्रथम दृष्टया मामला बनता है या नहीं.

क्या है मामला :

यह आदेश पश्चिम बंगाल सरकार की उस याचिका पर दिया गया, जिसमें उसने 20 जनवरी को कलकत्ता हाइकोर्ट द्वारा पारित उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत एनआइए एक्ट की धारा 6(5) के तहत एनआइए जांच पर विचार करने को कहा गया. चूंकि हाइकोर्ट के आदेश में यूएपीए लागू होने को लेकर कोई ठोस राय नहीं दी गयी, इसलिए हाइकोर्ट एनआइए की स्थिति रिपोर्ट पर स्वतंत्र रूप से विचार करे और आवश्यक निर्देश जारी करे.

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