महुआ मोईत्रा से सुप्रीम कोर्ट ने कहा- स्वतंत्रता सेनानियों ने तो गोलियां खायीं थीं, आपको अंडे से डर क्यों?

सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोईत्रा को पुलिस थाने में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित से छूट देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों ने गोलियां खायीं, आपको अंडों से डर क्यों? अब सांसद को नदिया जिले की होगलाबेरिया थाने की पुलिस के समक्ष 14 अगस्त को पूछताछ के लिए व्यक्तिगत रूप से हाजिर होना होगा.

धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोपों में घिरीं तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोईत्रा को सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया. पुलिस स्टेशन में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से छूट मांगने और वर्चुअली (ऑनलाइन) पेशी की अनुमति मांगने वाली महुआ मोईत्रा की याचिका पर देश की सबसे बड़ी अदालत ने विचार करने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने महुआ के वकील की उन दलीलों को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने ऊपर अंडे और पत्थर फेंके जाने का हवाला देकर व्यक्तिगत पेशी से सुरक्षा की गुहार लगायी थी.

14 अगस्त को सांसद को थाने में होना होगा हाजिर

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद ममता बनर्जी की फायरब्रांड सांसद मोईत्रा के वकील को अंततः अपनी याचिका वापस लेनी पड़ी. इसके चलते अब कृष्णनगर की सांसद को 14 अगस्त को नदिया जिले के होगलाबेरिया थाने में खुद उपस्थित होना ही पड़ेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का किया जिक्र

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ के समक्ष महुआ मोईत्रा के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि उनकी मुवक्किल को जांच में सहयोग करने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन वे यह प्रक्रिया वर्चुअल माध्यम से पूरी करना चाहती हैं. जब पीठ ने पूछा कि केवल सांसद होने के नाते वर्चुअल पेशी क्यों चाहिए, तो वकील ने हाल ही में महुआ पर हुए पथराव और अंडे फेंके जाने की घटनाओं का जिक्र किया.

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महुआ के वकील बोले- फिर बन सकता है अराजक माहौल

वकील ने आशंका जतायी कि थाने जाने पर फिर से अराजकता का माहौल बन सकता है. इस पर न्यायमूर्ति दत्ता ने स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग की मिसाल देते हुए मौखिक टिप्पणी की कि जब आप राजनीति में उतरे हैं, तो फिर अंडे फेंके जाने से क्यों डर रहे हैं? हमारे देश के स्वतंत्रता सेनानियों ने तो सीने पर गोलियां खायीं थीं. पीठ ने माना कि एक जनप्रतिनिधि को अंडे फेंके जाने जैसी घटनाओं से भयभीत नहीं होना चाहिए.

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कोलकाता हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में दी थी चुनौती

पूरा मामला नदिया जिले के होगलाबेरिया थाने में दर्ज उस प्राथमिकी से जुड़ा है, जिसमें महुआ मोईत्रा पर बुर्का पहनने को लेकर दिये गये बयानों के कारण धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगा है. इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने महुआ को राहत देते हुए अक्टूबर तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी. हालांकि, हाईकोर्ट ने शर्त रखी थी कि सांसद को जांच में पूर्ण सहयोग करना होगा. 14 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से थाने में हाजिर होना पड़ेगा. इसी व्यक्तिगत पेशी के आदेश को मोईत्रा ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

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अंडे फेंकने की राजनीति और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

1 जुलाई को नदिया में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान महुआ मोईत्रा को स्थानीय लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा था. महुआ मोईत्रा पर भी अंडे, सड़े बैंगन और पत्थर फेंके गये थे. पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद से टीएमसी नेताओं पर अंडे फेंके जाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं.

  • शमिक भट्टाचार्य (भाजपा) : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पश्चिम बंगाल प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने सार्वजनिक रूप से इस तरह के हमलों का विरोध करते हुए कहा कि यह बंगाल की संस्कृति नहीं है. भाजपा कार्यकर्ता इसमें शामिल नहीं हैं. यह जनता का रोष है.
  • कुणाल घोष (टीएमसी) : टीएमसी नेता कुणाल घोष ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि अदालत ऐसा कहेगी, तो सांसद सुरक्षा की गुहार लगाने कहां जायेंगी?
  • विकास रंजन भट्टाचार्य (कानूनविद) : कानूनविद विकास रंजन भट्टाचार्य और पूर्व न्यायाधीश अशोक गांगुली का मानना है कि अदालत ने यह टिप्पणी अनौपचारिक रूप से की होगी, जिसे लिखित आदेश में शामिल नहीं किया जाता.


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By मिथिलेश झा

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