Supreme Court Notice on Child Labor in Spa: देश के ‘ग्लैमर’ वर्ल्ड की अंधेरी गलियों में मासूम बच्चियों के शारीरिक और मानसिक शोषण पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया. कोर्ट ने केंदज्र सरकार, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और मानवाधिकार आयोग को नोटिस जारी किया है.
बच्चों को अश्लीलता के दलदल में धकेलना बर्दाश्त नहीं : सुप्रीम कोर्ट
ऑर्केस्ट्रा, मसाज पार्लर, स्पा और डांस बार जैसे क्षेत्रों में बच्चों के काम करने पर पूरी तरह रोक लगाने की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) और मानवाधिकार आयोग (NHRC) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्थिति को ‘अत्यंत गंभीर’ बताते हुए कहा कि बच्चों को अश्लीलता के दलदल में धकेलना कतई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा.
10 साल की उम्र और 10,000 रुपए में सौदा!
बाल अधिकार समूह जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन अलायंस (JRCA) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फुलका ने अदालत में चौंकाने वाले खुलासे किये. उन्होंने बताया कि कैसे गरीबी का फायदा उठाकर मासूमों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है.
बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
झूठे वादे, इंसानी मंडी और अश्लीलता का दबाव
गरीब समुदायों की बच्चियों को फिल्मों में रोल दिलाने या डांस ट्रेनिंग के बहाने बहलाया-फुसलाया जाता है. कई बच्चियों को महज 10,000 से 50,000 रुपए में बेच दिया जाता है. फिर कर्ज के चंगुल में फंसाकर जबरन उनसे मजदूरी करायी जाती है. मासूमों को नशे में धुत लोगों के सामने अश्लील कपड़े पहनकर प्रस्तुति देने के लिए मजबूर किया जाता है.
इसे भी पढ़ें : किशोरी को अश्लील वीडियो दिखा यौन उत्पीड़न की कोशिश
बिहार और बंगाल बने ‘सप्लाई चेन’ के केंद्र?
सर्वोच्च अदालत में जो आंकड़े पेश किये गये, उसने राज्यों की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2025 से मई 2026 के बीच चलाये गये बचाव अभियानों में चौंकाने वाली हकीकत सामने आयी. अकेले बिहार और पश्चिम बंगाल की नृत्य मंडलियों और ऑर्केस्ट्रा से 212 नाबालिगों को रेस्क्यू किया गया. दिल्ली और राजस्थान में मसाज पार्लर और स्पा से 12 नाबालिगों को बचाया गया. इनमें कुछ की उम्र महज 12 साल थी.
कानून की खामी का उठाया जा रहा फायदा
फिलहाल मसाज पार्लर और स्पा विनियमन (Regulation) की श्रेणी में आते हैं, न कि पूर्ण प्रतिबंध (Prohibition) की श्रेणी में. इसी का फायदा उठाकर 14-18 वर्ष के किशोरों को वहां काम पर रखा जा रहा है.
इसे भी पढ़ें : अश्लील तस्वीर वायरल होने से परेशान हो गयी थी छात्रा, फंदे से लटका मिला शव
सुप्रीम कोर्ट से मांग- खतरनाक व्यवसाय की सूची में हों शामिल
याचिका में मांग की गयी है कि केंद्र सरकार बाल और किशोर श्रम अधिनियम, 1986 की अनुसूची के ‘भाग-क’ में संशोधन करे. ऑर्केस्ट्रा, डांस बार, नौटंकी, स्पा और सैलून को ‘खतरनाक व्यवसायों’ की सूची में डाला जाये, ताकि 18 वर्ष से कम आयु के किसी भी बच्चे को वहां रखने पर जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान हो सके. याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि ये क्षेत्र देशभर में नाबालिग लड़कियों की संगठित तस्करी और यौन शोषण के ‘गुप्त ठिकाने’ बन गये हैं.
Supreme Court Notice on Child Labor in Spa: अगला कदम क्या?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय श्रम मंत्रालय और विधि मंत्रालय को नोटिस जारी कर पूछा है कि इन क्षेत्रों को अब तक पूरी तरह प्रतिबंधित क्यों नहीं किया गया है. इस मामले की अगली सुनवाई केंद्र के जवाब के बाद होगी, लेकिन इस हस्तक्षेप ने देश में चल रहे अवैध स्पा और ऑर्केस्ट्रा संचालकों की नींद उड़ा दी है.
इसे भी पढ़ें
समलैंगिक डेटिंग एप के जरिये बुलाकर युवक के साथ की अश्लील हरकतें, बनाया वीडियो, फिर करने लगे ब्लैकमेल
पत्नी पर अश्लील टिप्पणी करने पर ली थी दोस्त की जान
