मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए गेटकीपर ट्रेनिंग प्रोग्राम चला रहा राज्य का स्वास्थ्य विभाग

पर एबीबीएस की पढ़ाई शुरू करने से पहले ही छोड़ देते हैं, क्योंकि एबीबीएस का पाठ्यक्रम कठिन होने के साथ-साथ काफी बोझिल होता है.

एमबीबीएस के छात्रों को मेंटल सपोर्ट देने की एक विशेष पहल

कोलकाता. डॉक्टर बनने के बाद समाज में पूछ तो होती है, पर डॉक्टर बनना आसान नहीं है. इसके लिए एमबीबीएस पास करना पड़ता है. इससे पहले प्रवेश परीक्षा में बेहतर अंक हासिल करना पड़ता है, पर कुछ विद्यार्थी ऐसे भी होते हैं, जो प्रवेश परीक्षा में बेहतर अंक हासिल कर राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला ले तो लेते हैं, पर एबीबीएस की पढ़ाई शुरू करने से पहले ही छोड़ देते हैं, क्योंकि एबीबीएस का पाठ्यक्रम कठिन होने के साथ-साथ काफी बोझिल होता है. ऐसे में कॉलेज में दाखिला लेने के बाद कुछ छात्र एमबीबीएस कोर्स को देखकर भय से पढ़ाई छोड़ देते हैं. विद्यार्थियों की इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए राज्य के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में गेटकीपर प्रोग्राम चलाया जा रहा है. यह जानकारी राज्य स्वास्थ्य विभाग के हेल्थ एंड इंस्टीट्यूट ऑफ फैमली वेलफेयर के निदेशक प्रो डॉ कौस्तुभ नायक ने दी. वह शुक्रवार को साल्टलेक सेक्टर पांच स्थित राज्य स्वास्थ्य भवन में इंस्टीट्यूट ऑफ साइकेट्रिस्ट के साइकेट्रिस्ट सोशल वर्क विभाग की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे. डॉ नायक ने बताया कि कीपर ट्रेनिंग प्रोग्राम के जरिए राज्यभर के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस के छात्र-छात्राओं की काउंसिलिंग की जाती है. उन्होंने बताया कि एमबीबीएस के टीचर्स मनोचिकित्सा विभाग के चिकित्सकों की मदद से इस कार्य को करते हैं, ताकि मेडिकल के विद्यार्थियों में आत्महत्या करने की प्रवृति को कम किया जा सके. मौके पर उपस्थित इंस्टीट्यूट ऑफ साइकेट्रिस्ट के निदेशक प्रो डॉ अमीत भट्टाचार्य ने बताया कि गेट कीपर ट्रेनिंग प्रोग्राम के जरिए स्कूली बच्चों के साथ स्कूल के दरवान को भी ट्रेनिंग दिया जा सकता है, ताकि दरबान भी मानिसक तनाव से जूझ रहे बच्चों की पहचान कर सके.

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Author: GANESH MAHTO

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