चुनाव आयोग के आदेश पर राज्य सरकार ने चार अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की प्राथमिकी
चुनाव आयोग की सख्ती के बाद राज्य सरकार ने अपने चार अधिकारियों के खिलाफ मंगलवार को प्राथमिकी दर्ज कर ली.
By AKHILESH KUMAR SINGH | Updated at :
संवाददाता, कोलकाता
चुनाव आयोग की सख्ती के बाद राज्य सरकार ने अपने चार अधिकारियों के खिलाफ मंगलवार को प्राथमिकी दर्ज कर ली. मंगलवार शाम पांच बजे तक एफआइआर करने का आखिरी दिन था. मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर एफआइआर होने की जानकारी दे दी है. गौरतलब है कि एसआइआर प्रकिया शुरू होने से पहले राज्य के चार अधिकारियों पर मतदाता सूची में जान-बूझकर गड़बड़ी करने का आरोप लगा था. इसके बाद चुनाव आयोग ने चारों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया, लेकिन राज्य सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गयी. इसके बाद आयोग ने मुख्य सचिव को शुक्रवार को दिल्ली स्थित चुनाव आयोग कार्यालय में तलब किया और मंगलवार तक एफआइआर करने का अल्टीमेटम दे दिया. इन चारों अधिकारियों के नाम तथागत मंडल, देवत्तम दत्ताचौधरी, बिप्लब सरकार और सुदीप्त दास हैं. उधर, पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीइओ) के कार्यालय ने बताया कि निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त जिला मतदाता सूची पर्यवेक्षकों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के बाद मंगलवार को तीन ‘मतदाता सूची सूक्ष्म पर्यवेक्षकों’ (इआरएमओ) को भी निलंबित कर दिया गया. सीइओ कार्यालय के अनुसार, यह कार्रवाई तब की गयी जब यह सामने आया कि पर्यवेक्षक निर्धारित मानदंडों के अनुसार अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में विफल रहे थे.
सूची में फर्जी नाम जोड़ने का है आरोप
आरोपी चुनाव अधिकारियों पर दक्षिण 24 परगना जिले के बरुईपुर पूर्व विधानसभा क्षेत्र और पूर्वी मेदिनीपुर के मोयना विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूचियों में सौ से अधिक फर्जी नाम जोड़ने का आरोप है. आयोग ने पिछले साल अगस्त में कथित पेशेवर कदाचार का पता चलने के बाद राज्य सरकार को अधिकारियों को निलंबित करने और उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था. इन अधिकारियों में देवत्तम दत्ताचौधरी और तथागत मंडल (बरुईपुर पूर्व के इआरओ और एइआरओ), बिप्लब सरकार और सुदीप्त दास (मोयना के इआरओ और एइआरओ) शामिल हैं. हालांकि, राज्य सरकार ने अधिकारियों को निलंबित कर दिया था, पर केस दर्ज नहीं हुआ था. लेकिन शुरुआत में उसने प्राथमिकी दर्ज नहीं की. सरकार का कहना था कि ये कार्य ‘अनजाने में हुई गलतियां’ थीं. जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 का हवाला देते हुए आयोग ने राज्य के रुख को खारिज कर दिया, जनवरी में अनुस्मारक जारी किये और प्राथमिकी दर्ज करने के लिए 17 फरवरी की समय सीमा निर्धारित की.
अब तीन माइक्रो ऑब्जर्वर निलंबित
सात एइआरओ को सस्पेंड करने के बाद अब चुनाव आयोग ने एसआइआर नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में तीन माइक्रो ऑब्जर्वर को निलंबित कर दिया है. ये तीनों माइक्रो ऑब्जर्वर उत्तर 24 परगना के हैं और तीनों केंद्र सरकार के अधीन हैं. जानकारी के अनुसार, जिन तीन माइक्रो ऑब्जर्वर को निलंबित किया गया, उनमें ग्रामीण विकास बैंक के मैनेजर, यूको बैंक के सीनियर मैनेजर और सेंट्रल टैक्स (सीजीएसटी) के इंस्पेक्टर शामिल हैं. लापरवाही के अलावा इन तीनों पर बिना बताये गायब होने का आरोप है. इनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने का आदेश दिया गया है. जांच रिपोर्ट आयोग के पास भेजी जायेगी.