10 बस रूटों पर स्पीड मैनेजमेंट सिस्टम लागू : परिवहन मंत्री

यह पहल पश्चिम बंगाल को ऐसा सिस्टम लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनाती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पैदल यात्रियों की संख्या अधिक है.

सड़क दुर्घटनाएं कम करने में मददगार साबित होगा यह सिस्टम

कोलकाता. राज्य सरकार ने सड़क हादसों को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. परिवहन मंत्री स्नेहाशीष चक्रवर्ती ने विधानसभा में बताया कि सड़क सुरक्षा अभियान के तहत अब 10 बस रूटों पर स्पीड मैनेजमेंट सिस्टम लागू कर दिया गया है. यह पहल पश्चिम बंगाल को ऐसा सिस्टम लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनाती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पैदल यात्रियों की संख्या अधिक है. परिवहन मंत्री ने सोमवार को विधानसभा में जानकारी देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा जुलाई 2016 में शुरू किये गये ‘सेफ ड्राइव, सेव लाइफ’ अभियान के कारण पिछले 7-8 वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों में उल्लेखनीय कमी आयी है. वर्ष 2015 में राज्य में 17,555 दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 6,656 लोगों की जान गयी थी. यह संख्या 2023 में घटकर 13,795 दुर्घटनाएं और 6,027 मौतें रह गयी है. मंत्री ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह भी बताया कि सड़क दुर्घटनाओं और मौतों के मामले में कोलकाता की स्थिति देश के अन्य महानगरों से बेहतर है. दिल्ली में जहां 5,652 दुर्घटनाओं में 1,461 मौतें हुईं, वहीं कोलकाता में 1,942 दुर्घटनाओं में 191 लोगों की जान गयी. मंत्री ने यह भी बताया कि राज्य में ब्लॉक स्तर तक सड़क सुरक्षा समिति गठित की गयी है, जो दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए लगातार काम कर रही है.

स्पीड मैनेजमेंट सिस्टम की खास बातें

परिवहन मंत्री ने बताया कि स्पीड मैनेजमेंट सिस्टम को एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत लागू किया गया है. इसके तहत कोलकाता और एयरपोर्ट से सटे कुल 10 बस रूटों को शामिल किया गया है. सड़क की स्थिति और यातायात की तीव्रता के आधार पर अलग-अलग गति सीमाएं निर्धारित की गयी हैं, जिनकी अधिकतम सीमा 25 किमी/घंटा से 50 किमी/घंटा तक है. जीपीएस सिस्टम की मदद से गाड़ियों की गति पर लगातार नजर रखी जा रही है. यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों को पहले एक से दो बार चेतावनी दी जायेगी. इसके बाद भी यदि वे नियमों का पालन नहीं करते हैं, तो उनका लाइसेंस रद्द कर दिया जायेगा. यह नयी व्यवस्था उक्त बस रूटों पर चलने वाली सभी सरकारी और निजी बसों पर लागू होगी. स्कूल, बाजार और पैदल यात्रियों की अधिक आवाजाही वाले अन्य स्थानों पर गाड़ियों की गति सीमा विशेष रूप से सीमित की गयी है.

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