हुगली. चुंचुड़ा प्रेस क्लब में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में तंजीम-ए-उलेमा-ए-अहले सुन्नत के हुगली संगठन की ओर से आरोप लगाया कि एसआइआर प्रक्रिया के कारण सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ रहा है. संगठन का कहना है कि एक विशेष राजनीतिक दल सुनियोजित तरीके से एक समुदाय के लोगों के नाम सूची से हटाने का प्रयास कर रहा है. वर्ष 2002 की मतदाता सूची में नाम दर्ज होने के बावजूद लोगों को सुनवाई के नाम पर बुलाकर परेशान किया गया. संगठन के सदस्यों ने स्पष्ट कहा कि यह धारणा गलत है कि अल्पसंख्यक मुस्लिम किसी एक दल को वोट नहीं देते हैं, जो भी दल देश के विकास और जनकल्याण के लिए काम करता है, चाहे वह भाजपा हो या कांग्रेस, मुस्लिम समाज उसके साथ खड़ा रहता है. उन्होंने कहा कि मुस्लिम देश से प्रेम करते हैं और देश के लिए ही जीते हैं.
सदस्यों ने कहा कि हिंदू-मुस्लिम सभी समुदाय के लोग शांतिपूर्ण ढंग से साथ रहते हैं, आपसी कोई विभाजन नहीं है. संगठन के सचिव कमरुद्दीन साहिल हसमती, मोहम्मद अली राजा, मोहम्मद जमाल अख्तर मजहरी, शफीक कादरी, मौलाना मोईम और अदनान खान ने बताया कि एसआइआर के कारण आम लोगों को अनावश्यक रूप से परेशान किया गया. केवल मुस्लिम ही नहीं, अन्य समुदायों के लोग भी इससे प्रभावित हुए हैं.
इमाम भत्ता के संबंध में उन्होंने कहा कि किसी इमाम ने भत्ते की मांग नहीं की है. सरकार दे रही है इसलिए लिया जाता है, न दे तो कोई आपत्ति नहीं है. इस विषय में उनकी कोई विशेष मांग नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि एसआइआर की पूर्ण मतदाता सूची जारी होने के बाद यदि बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाये गये, तो वे कानूनी रास्ता अपनाएंगे. इस संबंध में जिलाशासक के माध्यम से निर्वाचन आयोग को पहले ही अवगत करा दिया गया है.
