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SIR Bengal: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर शनिवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में एक हाई लेवल मीटिंग हुई. यह मीटिंग सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई है. अधिकारियों ने बताया है कि हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल की अध्यक्षता में हुई बैठक का उद्देश्य एसआईआर की मॉनिटरिंग के लिए एक स्ट्रक्चर बनाना है. बैठक के बाद हाईकोर्ट ने एक पेज का आदेश जारी किया. इसमें कहा गया है कि 21 फरवरी से 9 मार्च 2026 तक सभी लीगल ऑफिसर्स की छुट्टियां रद्द रहेंगी. मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में ही छुट्टी मिलेगी.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुई बैठक
यह बैठक सुप्रीम कोर्ट के उस निर्देश के बाद हुई है, जिसमें कहा गया था कि वोटर लिस्ट के एसआईआर के शेष चरण न्यायिक अधिकारियों और पूर्व जजों की देखरेख में होने चाहिए. बैठक में मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज अग्रवाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए.
सुप्रीम कोर्ट ने दिया था ‘असाधारण’ निर्देश
पश्चिम बंगाल के सीईओ ने कहा कि इस बैठक से सभी हितधारकों को अपने विचार रखने और मौजूदा जटिलताओं को सुलझाने के साथ-साथ आगे की राह के बारे में स्पष्ट निर्देश प्राप्त करने का अवसर मिलेगा. सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार और निर्वाचन आयोग के बीच जारी गतिरोध पर नाराजगी जताते हुए राज्य में एसआईआर प्रक्रिया में आयोग की सहायता के लिए लीगल ऑफिसर्स और पूर्व जिला जजों को तैनात करने का शुक्रवार को ‘असाधारण’ निर्देश दिया था.
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कलकत्ता हाईकोर्ट को सुप्रीम कोर्ट ने दिये ये निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट से कहा था कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर के काम में सहायता के लिए कुछ लीगल सर्विस के ऑफिसर्स को कुछ दिनों के लिए काम से मुक्त करें और कुछ पूर्व जजों की खोज करें. सुप्रीम कोर्ट की 3 जजों की पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार ने एसआईआर के लिए ‘ए’ श्रेणी के पर्याप्त अधिकारी उपलब्ध नहीं कराये, तो सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सख्त ऐतराज जताया.
SIR Bengal: डेप्यूट होंगे लीगल ऑफिसर्स
शुक्रवार के अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल को निर्देश दिया था कि वह शनिवार को एक बैठक बुलायें. इसमें एसआईआर प्रक्रिया में न्यायिक अधिकारियों (लीगल ऑफिसर्स) की प्रतिनियुक्ति को अंतिम रूप दें. बैठक में चुनाव कार्य और एसआईआर की प्रक्रिया से जुड़े सभी स्टेकहोल्डर्स को शामिल करने की सलाह दी गयी थी.
कलकत्ता हाईकोर्ट ने क्या-क्या आदेश जारी किये?
- डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज/चीफ जज, एडीशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज, स्पेशल/सीबीआई कोर्ट के विशेष जज, कॉमर्शियल कोर्ट्स, स्पेशल कोर्ट फॉर ट्रायल ऑफ क्रिमिनल केसेज अगेंस्ट एमपी-एमएलए, सिटी सिविल कोर्ट और सिटी सेशन कोर्ट कलकत्ता की बेंच में पदस्थ जज 21 फरवरी से 9 मार्च 2026 तक कोई छुट्टी नहीं लेंगे, जब तक बहुत बड़ी मेडिकल इमरजेंसी न हो.
- उपरोक्त रैंक के सभी ज्यूडिशियल ऑफिसर्स से कहा गया है कि अगर वे छुट्टी पर हैं, तो 23 फरवरी 2026 तक काम पर लौट आयें. 9 मार्च 2023 तक मेडिकल इमरजेंसी को छोड़कर सारी छुट्टियां रद्द की जाती हैं, भले माननीय कोर्ट की ओर से उनकी छुट्टी को मंजूरी मिली हो.
- फास्ट ट्रैक कोर्ट के ज्यूडिशियल ऑफिसर्स से कहा गया है कि वे भी किसी तरह की छुट्टी लेने से परहेज करें. जजों से कहा गया है कि वे अपना स्टेशन न छोड़ें.
- अगर न्यायिक अधिकारियों का तबादला आदेश जारी हो चुका है और वह ट्रांसफर की स्थिति में हैं, तो 23 फरवरी 2026 तक उन्हें वर्तमान पोस्टिंग वाली जगह से हर हाल में रिलीज कर दिया जायेगा. वे 24 फरवरी 2026 को हर हाल में नयी जगह पर काम शुरू कर देंगे. इस दौरान ज्यूडिशियल ऑफिसर ट्रांजिट लीव नहीं लेंगे.
- ज्यूडिशियल ऑफिसर्स, जिनका डिस्ट्रिक्ट जज के रूप में तबादला हुआ है, वे 27 फरवरी 2026 की बजाय 26 फरवरी 2026 को ही नयी जगह पर काम शुरू कर देंगे. इस दौरान उन्हें कोई ट्रांजिट लीव नहीं मिलेगा.
- ज्यूडिशियल ऑफिसर्स के लिए 23 फरवरी 2026 से 9 मार्च 2026 तक अगर कोई ट्रेनिंग प्रोग्राम पहले से तय है, तो इसे अगले आदेश तक रद्द किया जाता है. इतना ही नहीं, राज्य के बाहर होने वाले तमाम ट्रेनिंग प्रोग्राम/सेमिनार, जिसमें बंगाल के ज्यूडिशियल ऑफिसर्स को शामिल होना है, अगले आदेश तक रद्द रहेंगे.
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