एसएससी परीक्षा में अतिरिक्त 10 अंकों पर गतिरोध जारी, कोर्ट का इंटरव्यू प्रक्रिया जारी रखने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वर्ष 2016 की नियुक्ति प्रक्रिया रद्द किए जाने के बाद स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) ने नये सिरे से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की थी. लेकिन अब नयी नियुक्ति प्रक्रिया में भी एसएससी द्वारा अनुभव के आधार पर 10 अतिरिक्त अंक देने के फैसले को लेकर विवाद खड़ा हो गया है और इसे लेकर गतिरोध जारी है.

कोलकाता.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वर्ष 2016 की नियुक्ति प्रक्रिया रद्द किए जाने के बाद स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) ने नये सिरे से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की थी. लेकिन अब नयी नियुक्ति प्रक्रिया में भी एसएससी द्वारा अनुभव के आधार पर 10 अतिरिक्त अंक देने के फैसले को लेकर विवाद खड़ा हो गया है और इसे लेकर गतिरोध जारी है. बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाइकोर्ट की न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने इंटरव्यू प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि नियुक्ति का भविष्य हाइकोर्ट के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा. इस मामले की अगली सुनवाई 28 नवंबर को निर्धारित की गयी है.सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सिन्हा ने सवाल किया कि अभ्यर्थियों का इंटरव्यू कब से शुरू होगा? 26 नवंबर से पहले या बाद में? इस पर एसएससी के वकील ने अदालत को बताया कि इंटरव्यू की तैयारी चल रही है और यह प्रक्रिया संभवतः 18 नवंबर से शुरू होगी. इसके पश्चात याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता शमीम अहमद ने अदालत को बताया कि नियुक्ति प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ रही है. गौरतलब है कि स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) ने शिक्षण अनुभव के आधार पर अभ्यर्थियों को 10 अतिरिक्त अंक आवंटित करने का निर्णय लिया था. इसके खिलाफ कलकत्ता उच्च न्यायालय में कई याचिकाएं दायर की गयी हैं. न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने यह भी कहा कि चूंकि यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में भी लंबित है, इसलिए वह फिलहाल अतिरिक्त अंकों के मुद्दे पर कोई आदेश नहीं देंगी.

कोर्ट में तालियों की गड़गड़ाहट से नाराज हुईं न्यायाधीश :

बुधवार को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा के न्यायालय कक्ष में असामान्य स्थिति उत्पन्न हो गयी. दोनों पक्षों के वकीलों के बीच बहस के दौरान परीक्षार्थियों के एक समूह ने वकील की दलीलों का समर्थन करते हुए ताली बजाना शुरू कर दिया. इस पर न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने गहरी नाराजगी जतायी. इसके बाद अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य ने न्यायाधीश को एक व्हाट्सएप संदेश दिखाया, जिसमें किसी ने अपने मुवक्किलों को मामले की सुनवाई के दौरान सुबह से ही अदालत कक्ष में इकट्ठा होने का निर्देश दिया था. उस संदेश में संकेत दिया गया था कि इससे अदालत पर दबाव बनेगा.

इस पर न्यायमूर्ति सिन्हा ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अदालत पर इस तरह दबाव डालने का प्रयास अस्वीकार्य है. उन्होंने निर्देश दिया कि भविष्य में ऐसे मामलों में मुवक्किलों को अदालत कक्ष में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जायेगी. न्यायमूर्ति ने यह भी कहा कि अब सुनवाई को ऑनलाइन माध्यम से भी देखा जा सकता है, इसलिए इच्छुक लोग अदालत में आने के बजाय लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए कार्यवाही देख सकते हैं.

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Published by: Bijay kumar

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