एसआइआर केंद्र में अफसरों को धमकाया! वीडियो वायरल

पांडुआ स्थित एसआइआर सुनवाई केंद्र में चुनाव आयोग के अधिकारियों को कथित रूप से हाथ-पैर तोड़ देने की धमकी देने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

हुगली.

पांडुआ स्थित एसआइआर सुनवाई केंद्र में चुनाव आयोग के अधिकारियों को कथित रूप से हाथ-पैर तोड़ देने की धमकी देने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने यह वीडियो अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर पूरे मामले पर सवाल खड़े किये हैं. हालांकि प्रभात खबर इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता. इस मामले में पांडुआ के तृणमूल नेता संजय घोष ने कहा कि चुनाव आयोग एसआइआर के नाम पर आम लोगों, विशेषकर बुजुर्गों को परेशान कर रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि सुनवाई के लिए आने वाले लोगों से जमा कराये गये दस्तावेजों की कोई रसीद नहीं दी जा रही है, जबकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार जमा किये गये कागजात की रसीद देना अनिवार्य है.

भाजपा गलत तरीके से बंगाल पर करना चाहती है कब्जा : तृणमूल

संजय घोष का कहना है कि जब लोग रसीद की मांग करते हैं, तो अधिकारी अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए यह तक कह देते हैं कि माथे पर स्टांप लगा देंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग के अधिकारी ऊपर से मिले निर्देशों के तहत काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि भाजपा नेता गलत तरीके से बंगाल पर कब्जा करना चाहते हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस आम जनता के साथ खड़ी है.

तृणमूल नेता बोले, धमकी देने की बात लोगों के हित में कही : उन्होंने यह भी कहा कि 80 से 90 वर्ष उम्र के अस्वस्थ बुजुर्गों को भी सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है, जो अमानवीय है. इसके विरोध में उन्होंने प्रदर्शन किया. संजय घोष ने कहा कि यदि गुस्से में हाथ-पैर तोड़ने जैसी बात कही गयी है, तो वह लोगों के हित में कही गयी थी. शुभेंदु अधिकारी द्वारा वीडियो पोस्ट किये जाने को उन्होंने राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताया.

भाजपा ने किया पलटवार : वहीं, हुगली सांगठनिक जिला भाजपा के उपाध्यक्ष स्वराज घोष ने पलटवार करते हुए कहा कि संजय घोष केवल अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा बढ़ाने के लिए इस तरह के बयान दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी बयानबाजी से कुछ हासिल नहीं होगा और इससे उनकी ही सरकार पर सवाल खड़े हो रहे हैं. स्वराज घोष के अनुसार आगामी 2026 की राजनीति में इस तरह के शोर-शराबे से कोई लाभ नहीं मिलने वाला है.

देश के लिए खेला, फिर भी नागरिकता साबित करनी पड़ रही है : रहीम नबी

देश के लिए करीब 100 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले और भारतीय राष्ट्रीय फुटबॉल टीम की कप्तानी संभाल चुके रहीम नबी को भी अब अपनी पहचान साबित करने के लिए चुनाव आयोग की एसआइआर सुनवाई में उपस्थित होना पड़ा. पांडुआ के कृषक बाजार स्थित सुनवाई केंद्र पर पहुंचकर पूर्व कप्तान ने सवाल उठाया कि जब एक राष्ट्रीय खिलाड़ी को इस प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है, तो आम लोगों की स्थिति कैसी होगी. नबी की सुनवाई 28 जनवरी को निर्धारित थी, लेकिन उस दिन उपस्थित न हो पाने के कारण वह शनिवार को केंद्र पहुंचे. वह पांडुआ के 274 नंबर बूथ के मतदाता हैं. मूल रूप से पांडुआ निवासी होने के बावजूद उनका अधिकांश समय कोलकाता में बीतता है. वर्ष 2016 में उन्होंने पांडुआ विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में चुनाव भी लड़ा था.

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Author: BIJAY KUMAR

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