पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने हाइकोर्ट के आदेश पर कोलकाता और हावड़ा की रिपोर्ट पेश की
कोलकाता. महानगर और हावड़ा शहर में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर कलकत्ता हाइकोर्ट के आदेश पर पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण पर्षद (डब्ल्यूबीपीसीबी) की ओर से अदालत में एक रिपोर्ट दाखिल की गयी है. हालांकि, इस रिपोर्ट को लेकर जनहित याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता ने गंभीर सवाल खड़े किये हैं. जनहित याचिकाकर्ता अधिवक्ता आकाश शर्मा ने कहा कि पर्षद की ओर से दाखिल जवाब में न तो किसी ठोस कार्ययोजना का उल्लेख है और न ही समयबद्ध तथा कानूनी रूप से बाध्यकारी कदमों की कोई स्पष्ट जानकारी दी गयी है. उन्होंने बताया कि पर्षद ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (जीआरएपी) को लेकर केवल शोध और प्रारंभिक परीक्षण की बात कही है, लेकिन यह नहीं बताया गया है कि इसे कब लागू किया जायेगा. अधिवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि औद्योगिक प्रदूषण, डीजल वाहनों, अंतरराज्यीय बसों, डीजल जनरेटर सेट और वाहन स्क्रैपेज नीति जैसे अहम मुद्दों पर पर्षद ने अपनी जिम्मेदारी परिवहन विभाग, पुलिस, पावर डिपार्टमेंट और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर डाल दी है. जनहित याचिका में जिन मुद्दों को विशेष रूप से उठाया गया था जैसे निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल पर सख्त कार्रवाई, औद्योगिक इकाइयों का प्रदूषण ऑडिट, रियल-टाइम उत्सर्जन डेटा को सार्वजनिक करना, उच्च एक्यूआइ वाले दिनों में सार्वजनिक स्वास्थ्य चेतावनी जारी करना और विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी समन्वय उन पर पर्षद की रिपोर्ट में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है. अधिवक्ता आकाश शर्मा ने कहा कि यदि जल्द ही कोलकाता-हावड़ा क्षेत्र के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी जीआरएपी, औद्योगिक प्रदूषण ऑडिट और सख्त प्रवर्तन व्यवस्था लागू नहीं की गयी, तो इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप के लिए आगे कदम उठाये जायेंगे.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
