सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाइकोर्ट की खंडपीठ के फैसले को बरकरार रखा कोलकाता. राज्य की निचली अदालतों में 29 न्यायाधीशों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है. सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता उच्च न्यायालय की खंडपीठ के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें नियुक्ति प्रक्रिया को मंजूरी दी गयी थी. इस मामले में निचली अदालत में न्यायाधीश पद के लिए आवेदन करने वाली अभ्यर्थी इवाना हुसैन ने नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. शुक्रवार को इस याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की खंडपीठ ने हाइकोर्ट की डिविजन बेंच के फैसले को सही ठहराया और याचिका खारिज कर दी. बता दें कि राज्य सरकार ने वर्ष 2022 में विज्ञप्ति जारी कर निचली अदालतों में 29 न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की थी. इनमें 12 स्पष्ट रिक्तियां (क्लियर वैकेंसी) और 17 अनुमानित रिक्तियां (एंटीसिपेटरी वैकेंसी) शामिल थीं. याचिकाकर्ता इवाना हुसैन की ओर से अधिवक्ता फिरदौस शमीम ने अदालत को बताया कि उनकी मुवक्किल अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी की उम्मीदवार हैं और ओबीसी सूची में उनका रैंक चौथा है. उनका तर्क था कि सूची में प्रथम स्थान पर मौजूद उम्मीदवार का नाम सामान्य श्रेणी की सूची में रखा जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. इसी कारण उनकी मुवक्किल के नाम की नियुक्ति के लिए सिफारिश नहीं हो सकी. याचिकाकर्ता पक्ष ने दावा किया कि नियुक्ति प्रक्रिया में आरक्षण नीति का सही तरीके से पालन नहीं किया गया. इस आधार पर पहले कलकत्ता हाइकोर्ट की एकल पीठ में याचिका दायर की गयी थी, जहां सुनवाई के बाद एकल पीठ ने नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी. हालांकि, बाद में हाइकोर्ट की खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश को पलटते हुए नियुक्ति प्रक्रिया को मंजूरी दे दी थी. इसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, लेकिन शीर्ष अदालत ने हाइकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए 29 न्यायाधीशों की नियुक्ति का रास्ता साफ कर दिया.
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