खास बातें
NIA Action in Bengal: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चुनाव 2026 से पहले एसआईआर का काम निबटा रहे न्यायिक अधिकारियों (Judicial Officers) को बंधक बनाने और उनके साथ दुर्व्यवहार के मामले के साथ-साथ सड़क जाम करने के मामले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है. एजेंसी ने मंगलवार को सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक प्रेस रिलीज जारी कर यह जानकारी दी है. कहा है कि बंगाल चुनाव से पहले हुए 2 मामलों में कुल 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
कालियाचक और मोथाबाड़ी में रात भर चली छापेमारी
सोमवार की पूरी रात कालियाचक और मोथाबाड़ी के अलग-अलग इलाकों में ताबड़तोड़ छापेमारी कर एनआईए ने इन दोनों मामलों के 15 आरोपियों को धर दबोचा. जजों को बंधक बनाने के हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक 68 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. जांच एजेंसी ने कहा है कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जायेगा.
हिंसा में सीधे तौर पर शामिल थे गिरफ्तार 14 लोग
एनआईए की टीम ने मालदा के कालियाचक और मोथाबाड़ी थाना क्षेत्रों से जिन लोगों को गिरफ्तार किया है, वे सीधे तौर पर हिंसा में शामिल थे. एनआईए के अनुसार, ये सभी लोग उस हिंसक घटना में सीधे शामिल थे, जहां जजों को बंधक बनाया गया था. पहले से गिरफ्तार आरोपियों, जिनमें ISF नेता शामिल हैं, से पूछताछ और घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद इन लोगों की पहचान की गयी.
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9 घंटे तक बंधक रहे थे 7 जज
घटना 1 अप्रैल की है, जब मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर)के लिए तैनात न्यायिक अधिकारियों पर भीड़ ने हमला बोल दिया था. मतदाता सूची से नाम हटाये जाने के विरोध में प्रदर्शन कर रही भीड़ अचानक उग्र हो गयी थी. हिंसक भीड़ ने 7 न्यायिक अधिकारियों को मोथाबाड़ी के बीडीओ (BDO) कार्यालय के भीतर बंधक बना लिया था.
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एक जज 9 घंटे तक गाड़ी में रहे कैद
आठवें न्यायिक अधिकारी को करीब 9 घंटे तक एक वाहन के भीतर कैद रखा गया. इस दौरान भीड़ ने वाहनों में तोड़फोड़ की और पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया. सुरक्षा बलों ने बड़ी मशक्कत के बाद देर रात इन अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला था.
राजनीतिक गलियारों में मचा था हड़कंप
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद एनआईए ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी. इस मामले में पहले ही इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के मोथाबाड़ी उम्मीदवार मौलाना शाहजहां अली कादरी और नेता गुलाम रब्बानी की गिरफ्तारी हो चुकी है. जांच अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने की एक संगठित साजिश थी.
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NIA की रडार पर अभी और कई बड़े चेहरे
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एनआईए अभी भी कई महत्वपूर्ण सुरागों पर काम कर रही है. गिरफ्तार किये गये उपद्रवियों से पूछताछ में कुछ नये नाम सामने आये हैं, जो इस हिंसा के मास्टरमाइंड हो सकते हैं. आने वाले दिनों में मालदा के अन्य इलाकों में भी ऐसी ही छापेमारी देखने को मिल सकती है.
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