देशव्यापी औद्योगिक हड़ताल का जूट मिलों पर पड़ा असर
देशव्यापी औद्योगिक हड़ताल का असर उत्तर 24 परगना जिले की जूट मिलों में भी देखने को मिला. हालीशहर स्थित हुकुमचंद जूट मिल और नैहाटी जूट मिल में उत्पादन पूरी तरह बंद रहा.
By AKHILESH KUMAR SINGH | Updated at :
बैरकपुर. देशव्यापी औद्योगिक हड़ताल का असर उत्तर 24 परगना जिले की जूट मिलों में भी देखने को मिला. हालीशहर स्थित हुकुमचंद जूट मिल और नैहाटी जूट मिल में उत्पादन पूरी तरह बंद रहा. इसके अलावा नैहाटी की नदिया जूट मिल में भी मजदूर काम पर नहीं पहुंचे. हड़ताल में सभी वामपंथी ट्रेड यूनियनें शामिल रहीं. यूनियनों ने नये लेबर कोड को रद्द करने और बंद पड़ी जूट मिलों को दोबारा चालू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. हालांकि गुरुवार को अधिकांश जूट मिलों के कई विभाग सामान्यतः भी बंद रहते हैं. इसी कारण मिल गेट पर मजदूरों की भीड़ अपेक्षाकृत कम दिखायी दी.
गंजेज जूट मिल गेट पर हड़ताल को लेकर तृणमूल-वामपंथियों में तीखी नोकझोंक
हुगली. बांसबेड़िया स्थित गंजेज जूट प्राइवेट लिमिटेड मिल के गेट पर औद्योगिक हड़ताल के समर्थन और विरोध को लेकर तृणमूल कांग्रेस समर्थकों तथा वामपंथी दलों के कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस और नोकझोंक हुई. सुबह से ही मिल गेट के बाहर विभिन्न ट्रेड यूनियनों के नेता और समर्थक नारेबाजी कर रहे थे. वामपंथी नेता रंजीत राय और कांग्रेस नेता एमडी रुस्तम सहित अन्य संगठनों के प्रतिनिधि हड़ताल के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे थे. इसी दौरान तृणमूल समर्थक श्रमिक मिल के भीतर प्रवेश करने लगे, जिससे दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया और कुछ समय तक तीखी कहासुनी हुई. कांग्रेस, वामपंथी तथा अन्य ट्रेड यूनियनों ने औद्योगिक हड़ताल के समर्थन में ‘न्यू लेबर कोड’ को काला कानून बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की. साथ ही सभी चटकलों में त्रिपक्षीय समझौते को पूर्ण रूप से लागू करने सहित श्रमिक हितों से जुड़ी अन्य मांगों को लेकर आंदोलन किया गया. इस हड़ताल में बीसीएमयू, एआइटीयूसी, टीयूसीसी, यूटीयूसी, एआइयूटीयूसी, आइएनटीयूसी, आरसीएमयू समेत कई संगठन शामिल रहे. वहीं भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) और तृणमूल ट्रेड यूनियन ने हड़ताल में भाग नहीं लिया. हड़ताल समर्थकों ने आंदोलन को सफल बताते हुए मजदूरों का आभार जताया.