मुर्शिदाबाद में इफ्तार पार्टी में शामिल हुए अर्धसैनिक बल के 7 जवानों पर गिरी गाज, 2 हिरासत में, 5 का ट्रांसफर

Murshidabad Iftar Party Controversy: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले एक इफ्तार पार्टी कॉन्ट्रोवर्सी सामने आयी है. मुर्शिदाबाद में चुनाव ड्यूटी के दौरान इफ्तार कार्यक्रम में शामिल होने पर अर्धसैनिक बलों के 7 जवानों को कार्रवाई का सामना करना पड़ा है. 2 जवानों हिरासत में ले लिया गया है, जबकि 5 का तबादला कर दिया गया है.

Murshidabad Iftar Party Controversy: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनजर निर्वाचन आयोग पूरी तरह ‘जीरो टॉलरेंस’ मोड में है. मामला मुर्शिदाबाद जिले में चुनाव ड्यूटी पर तैनात अर्धसैनिक बलों (Paramilitary Forces) के 7 जवानों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की गयी है. इन जवानों पर स्थानीय स्तर पर आयोजित एक इफ्तार कार्यक्रम में शामिल होने और आतिथ्य सत्कार स्वीकार करने का आरोप है. बुधवार को एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बड़ी कार्रवाई की पुष्टि की.

2 जवान हिरासत में, 5 को राज्य से बाहर भेजा

निर्वाचन आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सजा सुना दी. अधिकारी ने बताया कि दोषी पाये गये 7 जवानों में से 2 को केंद्रीय बलों की हिरासत में रखा गया है. शेष 5 जवानों को तत्काल प्रभाव से पश्चिम बंगाल से बाहर ट्रांसफर (Transfer) कर दिया गया है.

सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी तस्वीरें

मामला करीब एक सप्ताह पहले रमजान के दौरान मुर्शिदाबाद के नीमतीता में हुई थी. इफ्तार का आयोजन एक स्थानीय पंचायत प्रधान के पति ने किया था. इस कार्यक्रम में जवानों के शामिल होने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गयीं. इसके बाद चुनाव आयोग ने इसका संज्ञान लिया. हालांकि, संबंधित जवानों ने इन आरोपों से इनकार किया है. उनका दावा है कि इफ्तार का आयोजन बीएसएफ (BSF) कैंप के अंदर था और वहां स्थानीय प्रतिनिधियों को बुलाया गया था.

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स्थानीय लोगों से दूरी बनाये रखने के सख्त निर्देश

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव ड्यूटी पर तैनात किसी भी कर्मचारी को स्थानीय व्यक्तियों के सामाजिक समारोहों में शामिल होने या उनका आतिथ्य स्वीकार करने की अनुमति नहीं है. आयोग ने कहा कि बलों को अपनी तटस्थता (Neutrality) बनाये रखनी चाहिए, ताकि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर कोई सवाल न उठे.

केंद्रीय बलों पर चुनाव आयोग की पैनी नजर

अधिकारी ने बताया कि विभागीय जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही यह कार्रवाई की गयी है. आयोग अब इस बात पर कड़ी निगरानी रख रहा है कि केंद्रीय बलों का उपयोग सही ढंग से हो रहा है या नहीं, उनके ‘रूट मार्च’ कैसे हो रहे हैं और जमीनी स्तर पर उनका तालमेल कैसा है. किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा.

निर्वाचन आयोग ने इस घटना का कड़ा संज्ञान लिया है. चुनाव ड्यूटी पर तैनात कर्मियों को सामाजिक समारोहों में शामिल होने या स्थानीय व्यक्तियों से किसी भी प्रकार का आतिथ्य सत्कार स्वीकार करने की अनुमति नहीं है. केंद्रीय बलों को तटस्थ रहना चाहिए और स्थानीय हितधारकों से दूरी बनाये रखनी चाहिए.

निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारी

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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