राज्य की परियोजनाओं का फंड रोकने पर मंत्री ने केंद्र को चेताया

केंद्र पर ईएसआइ अस्पताल सेवा में बाधा डालने का आरोप

हल्दिया में श्रमिक सुरक्षा और स्वास्थ्य पर जागरूकता बैठक

हल्दिया. केंद्र सरकार द्वारा बंगाल को वंचित रखने का आरोप एक बार फिर तृणमूल नेताओं ने उठाया है. उनका कहना है कि केंद्र सरकार 100 दिन के रोजगार, घर निर्माण और कई परियोजनाओं के लिए धन रोककर बंगाल के लोगों को नुकसान पहुंचा रही है, जिससे मजदूरों की स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा आ रही है. बुधवार को हल्दिया के कुमार चंद्र जन सभागार में पश्चिम बंगाल सरकार के श्रम विभाग की पहल पर हल्दिया के मजदूरों के लिए व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य पर जागरूकता बैठक का आयोजन किया गया. बैठक में राज्य के श्रम, विधि एवं न्याय मंत्री मलय घटक, राज्यसभा सांसद और आइएनटीटीयूसी के प्रदेश अध्यक्ष ऋतब्रत बनर्जी, पश्चिम बंगाल सरकार के श्रम विभाग के सचिव अभिनंदन सिंह, हल्दिया विकास बोर्ड के अध्यक्ष ज्योतिर्मय कर, जिलाधिकारी पूर्णेंदु माजी, पुलिस अधीक्षक और अन्य लोग मौजूद थे. इस दौरान श्रमिकों की सुरक्षा के लिए हेलमेट और अग्निशामक यंत्रों के उचित उपयोग पर विशेष जोर दिया गया और श्रमिकों व उनके परिवारों के स्वास्थ्य के लिए हल्दिया में ईएसआई अस्पताल खोलने पर चर्चा की गयी. श्रमिकों ने अपनी समस्याएं भी साझा कीं और मांग की कि अस्पताल सेवा जल्द शुरू हो.

मजदूरों के हित में आंदोलन की चेतावनी

मंत्री मलय घटक ने भी आंदोलन की बात करते हुए कहा कि वामपंथी शासनकाल में मजदूरों को सेवाएं पाने के लिए पैसे देने पड़ते थे, लेकिन मौजूदा सरकार मजदूरों के लिए काफी काम कर रही है. पहले मजदूरों के वेतन में 500 से 1000 रुपये की बढ़ोतरी होती थी, अब यह राशि बढ़कर 5000 से 8000 रुपये प्रति सीओडी हो गई है. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र बंगाल को वंचित करने के साथ अब ईएसआई अस्पतालों से भी मजदूरों को वंचित कर रहा है. गुंधर पात्रा नामक एक मजदूर ने कहा कि ईएसआई अस्पतालों की सेवाओं के लिए साल-दर-साल पैसे कटते रहे हैं, फिर भी सेवाएं नहीं मिल रही हैं.

ईएसआइ अस्पतालों को मंजूरी नहीं देने का आरोप

राज्यसभा सांसद ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि न केवल हल्दिया, बल्कि सिलीगुड़ी के दोनों ईएसआई अस्पताल पूरी तरह से बनकर तैयार हैं और डॉक्टरों की नियुक्ति भी हो चुकी है, लेकिन केंद्र सरकार मंजूरी नहीं दे रही है. उन्होंने कहा कि 21 अगस्त को राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाया जायेगा और यदि सकारात्मक उत्तर नहीं मिला तो भविष्य में श्रमिकों के हित में आंदोलन करना पड़ेगा.

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Author: GANESH MAHTO

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