बंगाल में मांस पर तृणमूल-भाजपा में तकरार, शमिक भट्टाचार्य ने कही ये बात

Meat Controversy in Bengal: विधानसभा चुनाव 2026 से पहले पश्चिम बंगाल में मांस कंट्रोवर्सी सामने आयी है. इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आमने-सामने हैं. शमिक भट्टाचार्य ने साफ कर दिया है कि बंगाल के लोगों को मांस खाने से कोई नहीं रोक सकता. इस मुद्दे पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने और क्या-क्या कहा और क्या है पूरा विवाद, यहां पढ़ें.

Meat Controversy in Bengal: बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस के ‘खुले में मांस-मछली की बिक्री पर प्रतिबंध’ संबंधी आरोपों पर भाजपा और टीएमसी में तकरार जारी है. भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा है कि बंगाल के लोग अपनी पसंद का भोजन करने के लिए स्वतंत्र हैं. भाजपा केवल खुले में बीफ की बिक्री के खिलाफ है.

बंगाल में इस तरह शुरू हुआ मांस का विवाद

यह विवाद तब शुरू हुआ, जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने बिहार सरकार के खुले में मांस की बिक्री को रोकने का आदेश जारी किया. तृणमूल कांग्रेस ने इसे मांसाहार के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समर्थित कदम बताया.

बिहार में खुलेआम मछली-मांस की बिक्री पर प्रतिबंध को किया खारिज

पश्चिम बंगाल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने पड़ोसी राज्य बिहार में खुलेआम मछली और मांस की बिक्री पर प्रस्तावित प्रतिबंध संबंधी तृणमूल कांग्रेस के आरोपों को बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि बंगाल के लोग जो चाहेंगे, वही खायेंगे. बंगाल में मछली और मांस मिलता रहेगा.

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Meat Controversy in Bengal: तोड़-मरोड़कर टिप्पणियों को पेश कर रही तृणमूल कांग्रेस

बिहार सरकार के निर्देश पर विस्तार से बात करते हुए शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि भाजपा ने इस तरह के किसी भी प्रतिबंध का प्रस्ताव नहीं रखा था. उन्होंने कहा- वे कभी ऐसी बात कह ही नहीं सकते. क्यों कहें? कोई इसे स्वीकार नहीं करेगा. तृणमूल कांग्रेस इन टिप्पणियों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही है.

मांस की बिक्री मामले में तृणमूल कांग्रेस पर भाजपा ने लगाया दोहरा रवैया अपने का आरोप.

भाजपा खुलेआम बीफ की बिक्री के खिलाफ – शमिक

उन्होंने कहा कि अगर ऐसा कोई प्रतिबंध लागू होता है, तो बिहार या पश्चिम बंगाल में कोई भी इसका पालन नहीं करेगा. फिलहाल ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है. भाजपा नेता ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी का रुख केवल बीफ की खुलेआम बिक्री का विरोध करने तक ही सीमित है.

मांस-मछली बेचने वालों की आजीविका की चिंता

शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि बिहार में मछली और मांस की बिक्री पर कथित प्रतिबंध के मुद्दे पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने मंगलवार को छोटे व्यापारियों की आजीविका संबंधी चिंताओं की ओर ध्यान दिलाया था. उन्होंने कहा था- मुझे बिहार के उपमुख्यमंत्री के इस कथन से संबंधित एक रिपोर्ट मिली है कि मछली और मांस खुले बाजार में नहीं बेचे जा सकते. यह जनविरोधी और निंदनीय है.

ममता बनर्जी ने कही थी ये बात

ममता बनर्जी ने कहा था- क्या हर कोई शॉपिंग मॉल में मांस और मछली बेच सकता है? सड़क किनारे मछली और मांस बेचने वाले ज्यादातर विक्रेताओं का क्या होगा? उनकी आजीविका का क्या होगा? ऐसी राजनीति निंदनीय है.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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