केंद्रीय एनओसी के बगैर आयुष अस्पताल की जमीन पर बनाया जा रहा एमबीबीएस हॉस्टल

करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से इस अस्पताल को तैयार किया गया है.

शिव कुमार राउत, कोलकाता

नेशनल आयुष मिशन (नैम) और राज्य सरकार के संयुक्त सहयोग से वित्त वर्ष 2016-17 में पश्चिम मेदिनीपुर में इंटीग्रेटेड आयुष हॉस्पिटल बनाया गया था. करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से इस अस्पताल को तैयार किया गया है. इसमें नौ करोड़ केंद्र और छह करोड़ रुपये राज्य सरकार द्वारा आवंटित किया गया था. अस्पताल के लिए कुल नौ एकड़ जमीन चिह्नित की गयी थी. इनमें चार एकड़ जमीन पर अस्पताल का निर्माण किया गया है, जबकि पांच एकड़ जमीन खाली पड़ी हुई थी. इस खाली जमीन पर मरीज के परिजनों के लिए रात्रि निवास, लैब, स्टॉफ क्वार्टर, आयुष हर्बल गार्डेन आदि बनाये जाने की योजना थी. पर यह योजना कागजी ही बन कर रह गयी, क्योंकि आयुष अस्पताल की खाली पड़ी जमीन पर अब मेदिनीपुर मेडिकल कॉलेज के लिए मेल हॉस्टल बनाया जा रहा है. जहां एक साथ 200 मेडिकल स्टूडेंट्स रह सकेंगे. साथ ही इस इमारत में फैकल्टी रेजिडेंट्स भी बनाया जा है. बता दें कि इंटीग्रेटेड आयुष हॉस्पिटल के कैंपस में बनने वाली इस इमारत के लिए केंद्रीय आयुष मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) भी नहीं लिया गया है. एनओसी के बगैर यहां निर्माण कार्य भी शुरू हो चुका है. करीब 32 करोड़ पांच लाख 98 हजार 385 रुपये की लागत से यहां तीन मंजिली इमारत बनायी जा रही है. एक वर्ष में निर्माण कार्य को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. निर्माण कार्य अब शुरू हो चुका है. ऐसे में आयुष अस्पताल की जमीन पर बगैर अनुमति के हॉस्टल बनाये जाने से आयुष चिकित्सक नाराज हैं.

इस संबंध में बंगीय आयुर्वेद चिकित्सक संघ की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, आयुष मंत्रालय और नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के सचिव को पत्र लिखा है. पत्र में लिखा गया है कि एनओसी के बिना ही आयुष कैंपस में हॉस्टल का निर्माण कार्य शुरू हुआ है. इस संंबंध में संगठन के स्टेट को-आर्डिनेटर केशव लाल प्रधान की ओर पत्र लिखा गया है. उन्होंने हमें बताया कि, इंटीग्रेटेड आयुष हॉस्पिटल बनाया गया है. पर राज्य सरकार की लापरवाही के कारण यहां अब तक इंडोर वार्ड चालू नहीं हो सका है. बताया कि अस्पताल में आयुर्वेद, होम्योपैथी और योग का आउटडोर चलाया जा रहा है. उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष में ओपीडी में 26 हजार मरीजों का उपचार किया गया है. इनमें 17 हजार आयुर्वेद से और नौ हजार होम्योपैथी से मरीजों का उपचार किया गया. उन्होंने बताया कि इस अस्पताल को संचालित किये जाने के लिए 77 पदों पर चिकित्सक, नर्स सह अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को नियुक्त किया जाना था. पर राज्य सरकार ने मात्र दो नर्स को स्थायी रूप से नियुक्त किया, जबकि आसपास के सरकारी आयुष अस्पताल के चिकित्सकों से आउटडोर को चलाया जा रहा है.

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