एसआइआर मुद्दा
मुख्यमंत्री ने एसआइआर प्रभावित परिवारों के सदस्यों के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से की मुलाकात
सीएम ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर साधा निशाना, कहा- इतना घमंडी व झूठा सीइसी नहीं देखा
विरोध के प्रतीक के रूप में काला शॉल ओढ़ कर निर्वाचन सदन पहुंचीं मुख्यमंत्री, उनके साथ अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी भी थे
संवाददाता, कोलकाता
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त (सीइसी) ज्ञानेश कुमार के साथ सोमवार को बैठक बीच में ही छोड़कर बाहर निकल आयीं. सुश्री बनर्जी ने उनके प्रतिनिधिमंडल को ‘अपमानित’ करने का आरोप लगाया.‘विरोध’ के प्रतीक के रूप में काले शॉल ओढ़े हुए तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और सांसद कल्याण बनर्जी के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के ‘एसआइआर प्रभावित परिवारों’ के 12 सदस्यों के साथ नयी दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त कुमार और अन्य निर्वाचन आयुक्तों से मुलाकात की. सुश्री बनर्जी ने बाद में कहा कि उन्होंने विरोध में बैठक का ‘बहिष्कार’ किया. तृणमूल प्रमुख ने कहा कि चुनाव आयोग भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है. आयोग ने उनके सवालों का कोई जवाब नहीं दिया. सुश्री बनर्जी ने आरोप लगाया कि उनके नेतृत्व में चुनाव आयोग (इसीआइ) गये एक प्रतिनिधि को अपमानित किया गया. सीएम ने कहा कि उन्होंने इतना घमंडी, झूठा सीइसी आज तक नहीं देखा. मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग के पास अगर भाजपा है तो हमारे पास जनता का पावर (शक्त) है. हमलोग चुनाव का बहिष्कार नहीं करेंगे, बल्कि पूरी मजबूती से लड़ेंगे और एक बार फिर जीत हासिल करेंगे. बैठक का बायकाट कर बाहर आने के बाद मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा: मैंने आज तक ऐसा अहंकारी और झूठा चुनाव आयुक्त नहीं देखा. सुश्री बनर्जी ने कहा कि उन्होंने चुनाव आयुक्त से कहा कि उनकी कुर्सी का सम्मान करती हूं, क्योंकि कोई भी कुर्सी हमेशा के लिए नहीं रहती. एक दिन उनको जाना ही होगा. बंगाल को क्यों निशाना बनाया जा रहा है? यह चुनाव आयोग नहीं, भाजपा का आइटी सेल है. चुनाव आयोग पर भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि असली वोटर का नाम वोटर लिस्ट में शामिल किया जाना चाहिए. तृणमूल सुप्रीमो ने आगे सवाल करते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव से तीन महीने पहले एसआइआर करने की क्या जरूरत थी. चुनाव वाले राज्यों को इससे बाहर रखा जाना चाहिए था. उन्होंने पूछा कि असम में भाजपा की सरकार है. वहां, एसआइआर क्यों नहीं किया गया.