सटीक व समावेशी वोटर लिस्ट के लिए महत्वपूर्ण है एसआइआर

भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआइ) के संदर्भ में गणना शब्द का अर्थ है, पात्र मतदाताओं की पहचान करना, उनका पंजीकरण करना और मतदाता सूची को अद्यतन करना. यह प्रक्रिया सटीक और समावेशी मतदाता सूची सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.

कोलकाता.

भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआइ) के संदर्भ में गणना शब्द का अर्थ है, पात्र मतदाताओं की पहचान करना, उनका पंजीकरण करना और मतदाता सूची को अद्यतन करना. यह प्रक्रिया सटीक और समावेशी मतदाता सूची सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. इस संबंध में कलकत्ता हाइकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता देवब्रत उपाध्याय ने प्रभात खबर के ऑनलाइन सवालों का जवाब देते हुए बताया कि एसआइआर प्रक्रिया से डरने की जरूरत नहीं है. इससे किसी भी वैध मतदाता का नाम सूची से नहीं कटेगा.

उन्होंने शीर्ष अदालत के आदेश का उदाहरण देते हुए बताया कि हाल ही में गणना से संबंधित मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के दौरान मतदाता सूची से बाहर किये गये मतदाताओं की विस्तृत सूची प्रकाशित की जाये. इस निर्णय ने पारदर्शिता को अनिवार्य किया, ताकि इन सूचियों को सार्वजनिक किया जा सके और बहिष्कार के कारण बताये जा सकें, जिससे प्रभावित व्यक्ति यदि पात्र हों तो पुनः सम्मिलित होने का अवसर पा सकें. सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 324 और संबंधित विधियों के अंतर्गत निर्वाचन आयोग की शक्तियों पर बल दिया, ताकि मतदाता सूची का संशोधन निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया के अनुरूप किया जा सके. न्यायालय ने यह भी कहा कि स्वीकार्य पहचान प्रमाणों का विस्तार मतदाता-हितैषी है, लेकिन आधार को नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता. अतः, सर्वोच्च न्यायालय के दृष्टिकोण से गणना का अर्थ है निर्वाचन आयोग द्वारा की जाने वाली मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया, जिसमें पारदर्शिता, सटीकता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा पर विशेष बल दिया गया है. इस निर्णय में विशेष रूप से यह स्पष्ट किया गया कि निर्वाचन आयोग को मतदाता बहिष्कार सूची के प्रकाशन और पहचान दस्तावेजों के उपयोग को किस प्रकार संभालना चाहिए.

सवाल : लीज की अवधि खत्म होने के बाद पट्टेदार ने 25 वर्षों के लिए लीज के माध्यम से व्यवसाय करने के लिए दे दिया है. मैं पुन: उसे पाना चाहता हूं, क्या करूं?

-कैलाश साव, टीटागढ़

जवाब : लीज दाता व लीज ग्रहिता दोनों की आपसी सहमति के आधार पर लीज का दस्तावेज बनता है. सहमति होने के बाद ही आपने लीज पर बिजनेस करने के लिए जमीन दी है और उसकी समय सीमा जब तक है, वह उस पर अपना बिजनेस जारी रखेगा. लीज की अवधि खत्म होने के बाद स्वतः लीज ग्रहिता का दावा खत्म हो जायेगा. अगर लीज दाता चाहे, तो उसकी अवधि बढ़ा सकते हैं और नहीं चाहे, तो वह संपत्ति वापस ले सकता है.

सवाल : मेरी पुश्तैनी जमीन है, जो सेल डीड के माध्यम से खरीदी गयी है. उक्त जमीन के कुछ अंश पर दूसरा व्यक्ति जबरन दावा कर रहा है. सेल डीड में प्रस्तावित नक्शा भी संलग्न है जिसमें क्षेत्रफल अंकित है. क्या दूसरा व्यक्ति मेरी जमीन पर दावा कर सकता है?

-रागिनी सिन्हा, हावड़ा

जवाब : आपका सेल डीड पहले का बना है और बाद में दूसरा व्यक्ति अगर उपरोक्त सेल डीड में अंकित नक्शा के अंदर दावा करता है, तो बिना दस्तावेज का सही नहीं होगा. विवाद खत्म कराने व जमीन की मापी कराने के लिए सीओ के यहां आवेदन दे सकते हैं या फिर एसडीओ के यहां आवेदन दे सकते हैं. सरकारी स्तर से जमीन की मापी होगी व विवाद का समाधान हो जायेगा.

सवाल : मेरे पिता चार भाई हैं. बाकी तीन भाई मिलकर मेरे पिता को जमीन में हिस्सा नहीं दे रहे हैं. हिस्से की मांग करने पर झगड़ा शुरू हो जाता है. हमें क्या करना चाहिए?

-संतोष शर्मा, कमरहट्टी

जवाब : पुश्तैनी जमीन पर सभी का बराबर हिस्सा होता है. अपनी जमीन का हिस्सा पाने के लिए सिविल जज की अदालत में सभी वैध दस्तावेजों के साथ ओरिजनल सूट दाखिल करें. वंशवाली के सभी हिस्सेदारों को प्रतिवादी बनायें, चाहे लड़का हो या लड़की. सभी को समान हक पुश्तैनी जमीन में प्राप्त है. आपके पिता का भी अन्य भाइयों की तरह जमीन पर हक है.

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Published by: Bijay kumar

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