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Kapil Sibal on SIR: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पश्चिम बंगाल दौरे के ठीक पहले राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने देश के विभिन्न हिस्सों में चल री मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया और इसकी वजह से बूथ अधिकारियों की मौत पर सरकार को घेरा है. सोमवार को कपिल सिब्बल ने सरकार पर तंज कसा. उन्होंने प्रश्न किया कि अगर एक भी कथित ‘घुसपैठिया’ ठीक नहीं, तो क्या बूथ अधिकारियों की मौत ठीक है?’
बांकुड़ा में बीएलओ की मौत के बाद आया सिब्बल का पोस्ट
कपिल सिब्बल ने यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में एक बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) के मृत पाये जाने के एक दिन बाद की है. बीएलओ की मौत के बाद ऐसे आरोप लग रहे हैं कि एसआईआर से जुड़े कार्य-संबंधी दबाव के कारण उसकी मौत हुई.
Kapil Sibal on SIR: कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया पर लिखी ये बातें
कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ पर एक पोस्ट लिखा- बंगाल के एक और बीएलओ ने आत्महत्या कर ली. पूरे भारत में मरने वाले बीएलओ की संख्या 33 हो गयी है. अगर एक भी कथित ‘घुसपैठिया’ ठीक नहीं, तो क्या 33 बीएलओ का मरना ठीक है?
अमित शाह ने कहा था- देश के घुसपैठियों को बाहर निकालेगी सरकार
अमित शाह ने पिछले महीने कहा था कि सरकार देश से घुसपैठियों को बाहर निकालेगी. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ राजनीतिक दल एसआईआर का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि वे चाहते हैं कि घुसपैठियों को मतदाता सूची से बाहर न किया जाये.
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सुसाइडल नोट में लिखा- और नहीं सह सकता
पश्चिम बंगाल के रानीबांध ब्लॉक में रविवार को एक बीएलओ की मौत की खबर आयी. रविवार सुबह एक स्कूल परिसर से हराधन मंडल का शव मिला. पुलिस को हराधन मंडल के शव के पास एक सुसाइडल नोट मिला. इस पर लिखा था- और नहीं सह सकता. इसे एसआईआर के काम के दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है.
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राजकाटा क्षेत्र के बीएलओ थे हराधन मंडल
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि मंडल एक स्कूल शिक्षक थे और रानीबांध ब्लॉक के राजकाटा क्षेत्र के बूथ नंबर 206 के बीएलओ थे. अधिकारी के अनुसार, घटनास्थल से मृतक के हस्ताक्षर वाला एक नोट बरामद हुआ, जिसमें उसने कथित तौर पर बीएलओ के रूप में काम के दबाव से निपटने में असमर्थ होने का जिक्र किया था.
अप्रैल-मई में हो सकता है बंगाल चुनाव
पश्चिम बंगाल में अप्रैल-मई 2026 में विधानसभा के चुनाव होने की संभावना है. चुनावों से पहले इलेक्शन कमीशन ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (विशेष गहन पुनरीक्षण) अभियान चलाया है. इसके तहत 58 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काट दिये गये हैं. करीब 1.32 करोड़ लोगों को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाये जाने की संभावना है.
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