खास बातें
Sundarban News: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के सुंदरबन के जंगलों से सटे गांवों में बाघ की घुसपैठ रोकने की तैयारी चल रही है. इन इलाकों में बाघ को आने से रोकने के लिए हाईटेक कवच की व्यवस्था की जा रही है.
सोलर लाइट से चलते हैं ANIDERS
वन विभाग ने तकनीक आधारित नयी रणनीति बनायी है. जंगल की सीमा पर अत्याधुनिक ‘फिशिंग सेंसर लाइट’ और सोलर लाइट से चलने वाले एनिमल इंट्रूजन डिटेक्शन एंड रिपेलेंट सिस्टम (एएनआईडीईआरएस) लगाये जा रहे हैं.
26 किलोमीटर के एरिया में 300 फिशिंग सेंसर लाइट
वन विभाग ने बताया है कि कुलतली बीट कार्यालय क्षेत्र में करीब 26 किलोमीटर इलाके में करीब 300 विशेष फिशिंग सेंसर लाइट लगाये जा रहे हैं. जंगल से सटे खाल (बड़े नालों को बंगाल में खाल कहते हैं) और खाड़ियों के किनारे, जहां सुरक्षा जाल या नेट लगाये गये हैं, वहां ऊंचे पेड़ों की डालियों और जाल पर इन लाइट्स को लगाया जा रहा है.
शाम ढलते ही जल उठती है लाइट
वन विभाग के मुताबिक, शाम ढलते ही ये लाइटें स्वत: जल उठेंगी. इनसे लाल, नीली, पीली और हरी रोशनी निकलेंगी. अधिकारियों का दावा है कि अचानक बदलती तेज रोशनी बाघ को बस्तियों की ओर बढ़ने से रोकेगी. पाथरप्रतिमा क्षेत्र के एक गांव में एक्सपेरिमेंट के दौरान इसके पॉजिटिव रिजल्ट्स आये हैं. अब इस सिस्टम को कुलतली में भी लागू किया जा रहा है.
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बाघ को आने से रोकने के लिए 10 फुट ऊंचे नेट लगाये
दक्षिण 24 परगना वन विभाग के अधिकारियों ने बताया है कि बाघ को रोकने के लिए जंगल से सटे इलाकों में करीब 10 फुट ऊंचे नेट पहले ही लगाये जा चुके हैं. अब उन्हीं के पास और पेड़ों पर ये सेंसर लाइट लगाकर सुरक्षा घेरा को और मजबूत किया जा रहा है. स्थानीय निवासियों ने इसे राहत देने वाला कदम बताया है.
Sundarban News: हेरोवांगा-9 कंपार्टमेंट में लग रहा सिस्टम
इसी क्रम में रायदिघी रेंज के हेरोवांगा-9 वन कंपार्टमेंट के संवेदनशील इलाकों में वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया और दक्षिण 24 परगना वन विभाग की संयुक्त पहल पर एएनआईडीईआरएस प्रणाली स्थापित की जा रही है. यह गैर-घातक, तकनीक आधारित सिस्टम है, जो 180 डिग्री कोण में 25 से 30 मीटर तक की गतिविधि पहचान सकता है.
जानवर की मौजूदगी का संकेत देता है इंस्ट्रूमेंट
सौर पैनल से चलने वाले ये इंस्ट्रूमेंट्स किसी पशु या जानवर की मौजूदगी का संकेत मिलते ही वनकर्मियों को सतर्क कर देता है. फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के कर्मचारी अलर्ट हो जाते हैं और समय रहते उचित एक्शन लेते हैं, जिससे बाघों और अन्य जंगली जानवरों का आतंक कम होता.
कतर्नियाघाट की सफलता के बाद सुंदरबन में चल रहा प्रयोग
फिलहाल ऐसे 4 उपकरण लगाये गये हैं. पायलट प्रोजेक्ट के तहत इसकी तकनीकी क्षमता, पहचान की सटीकता और बाघ की घुसपैठ रोकने में यह कितना प्रभावी साबित हुआ है, इसका आकलन अभी किया जा रहा है. उत्तर प्रदेश के पीलीभीत और कतर्नियाघाट में सफल प्रयोग के बाद पहली बार सुंदरबन में इसे लागू किया गया है. वन विभाग का मानना है कि यदि यह प्रयोग सफल रहा, तो ह्यूमन-टाईगर कॉनफ्लिक्ट में कमी आयेगी. जंगल से सटे गांवों में सुरक्षा का नया मॉडल डेवलप होगा.
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