पाम ऑयल के बारे में मिथक को तोड़ना है बहुत आवश्यक

यह कहना है फूड एंड वेलनेस कंसल्टेंट नीलांजना सिंह का. उन्हाेंने कहा कि पाम ऑयल के बारे में जो मिथक है, उसे तोड़ना बहुत जरूरी है.

बोलीं – फूड एंड वेलनेस कंसल्टेंट नीलांजना सिंह कोलकाता. पिज्जा डो, इंस्टेंट नूडल्स, आइसक्रीम, चॉकलेट्स, बिस्कुट, साबुन, शैम्पू और लिपस्टिक में क्या समानता है? इसका उत्तर है पाम ऑयल. दरअसल, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अनुसार, पाम ऑयल लगभग हर चीज में पाया जाता है और हम जो पैक्ड प्रोडक्ट्स सुपरमार्केट में पाते हैं, उनमें से लगभग 50 प्रतिशत में पाम ऑयल होता है. यह कहना है फूड एंड वेलनेस कंसल्टेंट नीलांजना सिंह का. उन्हाेंने कहा कि पाम ऑयल के बारे में जो मिथक है, उसे तोड़ना बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा कि पाम ऑयल को आधुनिक चमत्कारी तेल माना जाता है, इसमें कोई गंध नहीं होती, इसमें ट्रांस फैट्स की कोई मात्रा नहीं होती और इसमें कोलेस्ट्रॉल नहीं होता. इसका स्मोक प्वाइंट (धुआं छोड़ने का तापमान) उच्च होता है. उन्होंने कहा कि वैकल्पिक तेलों के बारे में विचार करते हुए, हम कृषि भूमि उपयोग के आंकड़ों पर भी विचार करें तो पायेंगे कि पाम ऑयल दुनिया की 35 से 40 प्रतिशत वनस्पति तेल की मांग को सिर्फ छह प्रतिशत भूमि पर पूरा करता है. जबकि सोयाबीन, नारियल या सूरजमुखी तेल से समान मात्रा प्राप्त करने के लिए आपको चार से 10 गुना अधिक भूमि की आवश्यकता होगी. पाम ऑयल प्रति हेक्टेयर 2.8 टन तेल उत्पन्न करता है, जबकि जैतून 0.34 टन, नारियल 0.26 टन और सूरजमुखी 0.7 टन तेल उत्पन्न करता है. हम वर्तमान में 322 मिलियन हेक्टेयर (भारत के आकार के बराबर) भूमि पर तेल फसलों का उत्पादन करते हैं. अगर हम पाम ऑयल का उत्पादन करें तो हमें केवल 77 मिलियन हेक्टेयर की आवश्यकता होगी, लेकिन अगर हम इसे जैतून के तेल से प्राप्त करें, तो हमें 660 मिलियन हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Ganesh mahto

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >