केंद्र सरकार की हर योजना को राज्य सरकार स्वीकार करे, यह जरूरी नहीं : हाइकोर्ट

ऐसा ही आदेश कलकत्ता हाइकोर्ट के न्यायाधीश शुभेंदु सामंत ने एक मामले की सुनवाई करते हुए दिया

कोलकाता.

केंद्र सरकार की हर योजना को राज्य सरकार लागू करे, यह अनिवार्य नहीं है. राज्य चाहे तो इसे स्वीकार कर सकता है या इसे लागू नहीं भी कर सकता है. ऐसा ही आदेश कलकत्ता हाइकोर्ट के न्यायाधीश शुभेंदु सामंत ने एक मामले की सुनवाई करते हुए दिया. कलकत्ता हाइकोर्ट के न्यायाधीश शुभेंदु सामंत ने केंद्र के सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार विश्वविद्यालय और कॉलेज शिक्षकों के वेतन संशोधन मामले में यह टिप्पणी की.

उन्होंने कहा कि हर केंद्रीय योजना राज्य के लिए अनिवार्य नहीं है. अगर राज्य इसे स्वीकार नहीं करता है, तो अदालत इसे लागू करने के लिए बाध्य नहीं कर सकती. वेतन को लेकर कॉलेज शिक्षकों के मामले को खारिज करते हुए, उच्च न्यायालय ने कहा कि वेतन संरचना और कार्यान्वयन राज्य के नीतिगत निर्णय हैं. अदालत इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगी. गौरतलब है कि दो नवंबर, 2017 को केंद्र ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार विश्वविद्यालय और कॉलेज शिक्षकों के लिए वेतन संशोधन कार्यक्रम की घोषणा की. उस योजना के अनुसार, नया वेतन ढांचा एक जनवरी, 2016 से प्रभावी होना था. कॉलेज शिक्षक सुरंत गंगोपाध्याय ने उच्च न्यायालय में एक मामला दायर कर आरोप लगाया कि राज्य ने योजना को स्वीकार कर लिया था, लेकिन यह एक जनवरी, 2020 से लागू हुआ.

यानी वे चार साल से वित्तीय लाभ से वंचित हैं.राज्य सरकार के वकील सोमनाथ गंगोपाध्याय ने तर्क दिया कि केंद्र सरकार की परियोजना को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया गया है. चूंकि केंद्र ने कोई सहायता नहीं दी है, इसलिए राज्य को पूरी लागत वहन करनी होगी. इसलिए, यह राज्य का नीतिगत निर्णय है कि इसे कब लागू किया जायेगा. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, अदालत ने कहा कि यदि राज्य चाहे, तो वह शिक्षकों के लिए केंद्र के नये वेतन संरचना को अपना सकता है. हालांकि, यह अनिवार्य नहीं है.

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By SANDIP TIWARI

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