कोलकाता.
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के विवादों के बीच केंद्र सरकार ने बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले नागरिकता से जुड़े आवेदनों की जांच और मंजूरी के लिए एक विशेष समिति बना दी है. गृह मंत्रालय ने 20 फरवरी को आदेश जारी कर बताया कि यह समिति नागरिकता अधिनियम 1955 और उसके नियमों के तहत बनायी गयी है.समिति में कौन-कौन रहेंगेसमिति मुख्य रूप से उन लोगों के आवेदन देखेगी, जो संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के तहत भारतीय नागरिकता लेना चाहते हैं. समिति की अध्यक्षता बंगाल के जनगणना संचालन निदेशालय के डिप्टी रजिस्ट्रार जनरल करेंगे. इसके अलावा इसमें खुफिया ब्यूरो, विदेशी पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ), राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआइसी), डाक विभाग और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे.
केंद्रीय गृह विभाग की ओर से कहा गया है कि यह समिति आवेदन की जांच, दस्तावेजों की पुष्टि और नागरिकता देने की सिफारिश जैसे काम करेगी. यह व्यवस्था नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) 2019 के तहत बनायी गयी प्रक्रिया का हिस्सा है. सीएए के अनुसार पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न के कारण 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आये हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को नागरिकता पाने का रास्ता दिया गया है.नागरिकता आवेदनों की जांच प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद : बंगाल की बांग्लादेश से लंबी सीमा होने और यहां पहले से प्रवासियों के आने के कारण इसे महत्वपूर्ण राज्य माना जाता है. नयी समिति बनने से अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के बीच तालमेल बढ़ेगा और नागरिकता आवेदनों की जांच प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है. बता दें कि, सीएए को लेकर राज्य में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं.
