कोलकाता. रक्षा मंत्रालय की अधीनस्थ गार्डनरीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने बुधवार को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की इकाई नौसेना भौतिकी एवं समुद्र वैज्ञानिक प्रयोगशाला के लिए एक अत्याधुनिक ध्वनिक अनुसंधान पोत (एकॉस्टिक रिसर्च शिप – एआरएस) की कील रखी. डीआरडीओ अध्यक्ष डॉ समीर वी कामत भी तब उपस्थित थे. इस उन्नत अनुसंधान पोत के लिए अनुबंध अक्तूबर 2024 में जीआरएसई और एनपीओएल के बीच हुआ था. यह पोत कुल 93 मीटर लंबा और 18 मीटर चौड़ा होगा, जिसमें अत्याधुनिक अनुसंधान उपकरण लगाये जायेंगे. अधिकतम गति पर यह पोत एक मिशन में 30 दिनों तक अथवा 4,500 समुद्री मील की दूरी तय करने में सक्षम होगा. इसमें 120 कर्मियों के रहने की व्यवस्था होगी. इस मौके पर डॉ समीर वी कामत ने कहा कि एनपीओएल द्वारा 1994 से जीआरएसई द्वारा निर्मित सागरध्वनि का संचालन किया जा रहा है. नया पोत और अधिक उन्नत होगा.
जीआरएसई के सीएमडी कमोडोर पीआर हरि (सेवानिवृत्त) ने दिवंगत डॉ एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि शिपयार्ड न केवल युद्धपोत निर्माण में अग्रणी है, बल्कि स्वायत्त प्लेटफार्म, हरित ऊर्जा पोत और पोर्टेबल इस्पाती पुल जैसे नवाचार क्षेत्रों में भी अनुसंधान और विकास को बढ़ावा दे रहा है. उन्होंने बताया कि जीआरएसई फिलहाल देश का एकमात्र शिपयार्ड है, जो अनुसंधान पोतों का निर्माण कर रहा है.
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