हर घर पहुंचेगा भूजल, पंपों की खरीद और मरम्मत के लिए निगम ने जारी किया टेंडर

इन वार्डों में रहनेवाले लोगों को वर्षों से पेयजल के परेशान होना पड़ता है.

कोलकाता. महानगर के एडेड इलाके यानी वार्ड 101 से लेकर 144 नंबर वार्ड के लोगों को आज भी ट्यूबवेल के पानी पर निर्भर रहना पड़ता है. ऐसे में घर-घर भूजल पहुंचाने के लिए कोलकाता नगर निगम ने पंपों की खरीद और मरम्मत के लिए लाखों रुपये की निविदाएं आमंत्रित की है. इन वार्डों में रहनेवाले लोगों को वर्षों से पेयजल के परेशान होना पड़ता है. हालांकि कुछ इलाकों में गार्डेनरीच वाटर वर्क्स के सौजन्य से पेयजल उपलब्ध है, लेकिन शेष बड़े इलाके अब भी ट्यूबवेल के पानी यानी भूजल पर निर्भर हैं. हालांकि मेयर फिरहाद हकीम ने बार-बार विभिन्न परियोजनाओं की बात की है, लेकिन नगर निगम से मिली जानकारी कुछ और ही कहती है. निगम सूत्रों के अनुसार जल आपूर्ति विभाग और ट्यूबवेल विभाग द्वारा हाल ही में निविदाएं आमंत्रित की गयी हैं. बताया गया है कि नलकूपों से पानी निकालने के लिए सबमर्सिबल पंप खरीदे जायेंगे और इन सभी नलकूपों की कई जगहों पर मरम्मत भी की जायेगी. वार्ड 133 और 137 में इस कार्य के लिए लगभग एक लाख रुपये आवंटित किये गये हैं. इसी प्रकार, वार्ड 138 और 140 में भी लगभग एक लाख रुपये आवंटित किये गये हैं. वार्ड 139, 140 और 141 में भी पंपों के लिए एक लाख रुपये आवंटित किये गये हैं. पता चला है कि वार्ड संख्या 133, 136 और 138 में सबमर्सिबल पंपों के लिए 96 हजार रुपये से अधिक राशि आवंटित की गयी है. वार्ड 139 में एक गहरे ट्यूबवेल पंप के लिए 93 हजार से अधिक राशि आवंटित की गयी है. इसी तरह वार्ड 138 में एक गहरे ट्यूबवेल पंप के लिए 65 हजार रुपये आवंटित किये गये हैं. वार्ड 121 और 132 में 56 छोटे ट्यूबवेलों की मरम्मत के लिए 50 हजार रुपये आवंटित किये गये हैं. वार्ड संख्या 130 और 131 में 55 छोटे ट्यूबवेलों की मरम्मत के लिए 50 हजार रुपये आवंटित किये गये हैं. वार्ड नंबर 143 के लिए एक लाख रुपये आवंटित किये गये हैं. वार्ड 121 में दो छोटे ट्यूबवेलों के लिए 86 लाख रुपये आवंटित किये गये हैं. निगम के एक अधिकारी ने बताया कोलकाता के एडेड वार्डों में चरणबद्ध तरीके से काम चल रहा है. धापा जल उत्पादन केंद्र की क्षमता बढ़ाई जायेगी. गरिया ढलाई ब्रिज के पास बूस्टिंग पंपिंग स्टेशन बनाया जा रहा है. इससे जलापूर्ति की समस्या का समाधान होगा, तभी ट्यूबवेल पर निर्भरता कम होगी.

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Author: GANESH MAHTO

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