चिटफंड घोटाला में मुख्य आरोपी तहसीन अहमद के खिलाफ दर्ज हुआ चौथा मामला

एक्शन. 350 करोड़ रुपये के घोटाले में एक के बाद एक दर्ज हो रही प्राथमिकी

एक्शन. 350 करोड़ रुपये के घोटाले में एक के बाद एक दर्ज हो रही प्राथमिकी

आसनसोल नॉर्थ थाने, आसनसोल साउथ थाने, जामुड़िया थाने के बाद हीरापुर थाने में दर्ज हुई चौथी प्राथमिकी

आसनसोल.चिटफंड कंपनी बनाकर करीब तीन हजार लोगों से कथित तौर पर 350 करोड़ रुपये ठगी के मामले के मुख्य आरोपी तहसीन अहमद के खिलाफ एक नया मामला हीरापुर थाना में दर्ज हुआ. हीरापुर थाना क्षेत्र के हिलव्यू नॉर्थ ग्वालापाड़ा इलाके के निवासी शबाब अख्तर खान ने पांच लाख रुपये ठगी का आरोप लगाकर थाने में शिकायत दर्ज करायी. जिसके आधार पर हीरापुर थाने में तहसीन के खिलाफ कांड संख्या 362/25 में बीएनएस की धारा 318(4)/316(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज हुई. तहसीन के खिलाफ यह चौथा मामला दर्ज हुआ. पहला मामला आसनसोल साउथ थाना क्षेत्र की निवासी मौटूषि दत्ता की शिकायत पर 22 अक्तूबर 2025 को आसनसोल नॉर्थ थाने में दर्ज हुआ. दूसरा मामला हॉटन रॉड इलाके के निवासी शहनवाज आलम की शिकायत पर आसनसोल साउथ थाने में पांच नवंबर 2025 को दर्ज हुआ. तीसरा मामला जामुड़िया थाने के स्थानीय निवासी उमर फारूख की शिकायत पर 12 नवंबर को दर्ज हुआ था. अब यह चौथा मामला हीरापुर थाने में दर्ज हुआ. तहसीन को पुलिस ने 25 अक्तूबर को गिरफ्तार किया ���ा, उसके बाद से वह लगातार पुलिस रिमांड में ही घूम रहा है. फिलहाल वह जामुड़िया थाने में पुलिस रिमांड में है. जामुड़िया थाने की पुलिस ने उसे दो किश्तों में सात और तीन कुल दस दिनों की रिमांड पर रखा है, सोमवार को रिमांड अवधि समाप्त होने पर उसे अदालत में पेश किया जायेगा. संभावना है कि हीरापुर थाने की पुलिस अपने मामले में उसे रिमांड पर लेने के लिए अदालत में अपील करेगी. तहसीन के खिलाफ आसनसोल नॉर्थ थाने में दर्ज मामले की जांच आर्थिक अपराध निदेशालय (डीइओ) को दी गयी है. इसके बाद और तीन मामले दर्ज हो गये. सभी मामलों की जांच का दायित्व डीइओ को सौंपे जाने की संभावना है. जब तक यह सौंपा नहीं जाता है, तबतक इसकी जांच संबंधित थाने की पुलिस ही करेगी.

कैसे ठगी की तहसीन ने शबाब से?

हीरापुर थाने में दर्ज मामले में शिकायतकर्ता शबाब अख्तर खान ने कहा कि तहसीन अहमद के साथ उसकी मुलाकात चित्रा मोड़ के पास स्थित गैलेक्सी मॉल में दिसंबर 2024 में हुई थी. एक दोस्त के माध्यम से उसके साथ परिचय हुआ. तहसीन ने उसे निवेश पर उच्च रिटर्न देने वादा किया. जिसके आधार पर उसने लोन लेकर पांच लाख रुपये का निवेश किया, जिसपर प्रतिमाह 72 हजार रुपये रिटर्न (32 हजार ऑनलाइन और 40 हजार रुपये नकद) देने का समझौता हुआ. तहसीन ने पांच लाख रुपये का चेक भी दिया, डिफॉल्ट होने पर चेक जमाकर पैसे निकाल लेने को कहा. समझौते की प्रति उसने कभी नहीं दी, वह इसे टालता रहा. 23 फरवरी 2025 को समझौते के तहत 72 हजार रुपये उसने रिटर्न दिया. 25 मार्च को मंथली रिटर्न लेने गया तो वह बहाने बनाने लगा और बार-बार समय मांगता रहा. सोशल मीडिया पर उसने देखा कि उसका ट्रेडिंग का बिजनेस पूरी तरह बंद हो गया है, उससे संपर्क करने पर वह बहाने बनाता रहा. पैसे का भुगतान नहीं किया. चेक भी पुराना होने के कारण वैलिड नहीं रहा.

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Published by: Sandip tiwari

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