मुख्य बातें
Election Commission: कोलकाता : चुनाव आयोग ने बीएलओ (मुख्य निर्वाचन अधिकारी) के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. SIR में मिल रही गड़बड़ी को देखते हुए चुनाव आयोग ने बंगाल में बड़ा फैसला लिया है. बंगाल में अब मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है. राष्ट्रीय निर्वाचन आयोग ने नियमों के अनुसार सभी राज्यों के सीईओ को यह अधिकार सौंप दिया है. सभी राज्यों के सीईओ को पत्र भेजा जा चुका है. पत्र में उन्हें निर्देश दिया गया है कि यदि किसी भी बीएलओ के खिलाफ कोई शिकायत प्राप्त होती है, तो वे कानून के अनुसार तुरंत कार्रवाई करें.
दिल्ली से आदेश लेने की जरुरत नहीं
चुनाव आयोग से जारी पत्र के अनुसार बंगाल में सीईओ अपने दम पर अब निर्णय ले सकते हैं. विभागीय सूचना अधिकारी (डीईओ) या विभागीय सूचना अधिकारी (ईआरओ) की रिपोर्ट के आधार पर भी कार्रवाई कर सकते हैं. इसमें निलंबन का आदेश देना, विभागीय जांच शुरू करना या एफआईआर दर्ज करना शामिल है. लंबे समय तक चुनाव आयोग सीईओ की अनुपस्थिति में निर्णय लेता था. अब यह स्वतंत्रता सीओ को दे दी गई है. अब किसी बीएलओ पर कार्रवाई के लिए दिल्ली से आदेश आने का इंतजार नहीं करना होगा. अब सारी कार्रवाई कोलकता से ही की जा सकती है.
अब केवल जानकारी दिल्ली भेजनी होगी
पत्र में कहा गया है कि सीईओ लापरवाही, दुराचार, आयोग के निर्देशों की जानबूझकर अवज्ञा करने पर सीधे कार्यारवाई कर सकते हैं. मतदाता पंजीकरण नियमों का उल्लंघन करने के लिए किसी भी बीएलओ के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकते हैं. सीईओ या डीईओ संबंधित बीएलओ को निलंबित कर सकते हैं. अनुशासन तोड़ने या कर्तव्य में लापरवाही के लिए विभागीय जांच के आदेश दे सकते हैं. उस स्थिति में, आयोग संबंधित अधिकारियों को सिफारिशें भेजेगा. इन सिफारिशों के आधार पर, कार्रवाई होगी और छह महीने के भीतर की गई कार्रवाई की जानकारी आयोग को दी जायेगी. यदि आवश्यक हो, तो डीईओ, सीईओ की मंजूरी से संबंधित बीएलओ के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कर सकता है.
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