नारायण देबनाथ की रचनाएं नहीं बेच पायेगा प्रकाशक

कलकत्ता हाइकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के अंतरिम निषेधाज्ञा आदेश बरकरार रखी, जिसमें कोलकाता स्थित पब्लिशिंग हाउस देव साहित्य कुटीर प्राइवेट लिमिटेड को नौ फरवरी तक दिवंगत लेखक और कार्टूनिस्ट नारायण देबनाथ की साहित्यिक और कलात्मक रचनाओं को छापने, प्रकाशित करने, बेचने या वितरित करने से रोका गया.

कोलकाता.

कलकत्ता हाइकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के अंतरिम निषेधाज्ञा आदेश बरकरार रखी, जिसमें कोलकाता स्थित पब्लिशिंग हाउस देव साहित्य कुटीर प्राइवेट लिमिटेड को नौ फरवरी तक दिवंगत लेखक और कार्टूनिस्ट नारायण देबनाथ की साहित्यिक और कलात्मक रचनाओं को छापने, प्रकाशित करने, बेचने या वितरित करने से रोका गया. ऐसा करते हुए कोर्ट ने कहा कि लेखक की विधवा, जो देबनाथ की वसीयत की निष्पादक हैं और वादी नंबर दो यानी उनके बेटे जो वसीयत के लाभार्थी हैं, भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के तहत प्रोबेट मिलने से पहले भी ट्रायल कोर्ट के सामने मुकदमा दायर करने के पूरी तरह हकदार हैं. जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य और जस्टिस सुप्रतीम भट्टाचार्य की डिविजन बेंच ने कहा कि मामले के इन पहलुओं पर विचार करते हुए हमें ट्रायल जज के फैसले की जगह अपने वैकल्पिक विचार रखने का कोई कारण नहीं दिखता भले ही ऐसा करना संभव हो, क्योंकि विवादित आदेश में कानून या तथ्यों के आधार पर कोई गलती नहीं थी. ट्रायल जज ने निषेधाज्ञा आवेदन और शिकायत में किये गये दावों के आधार पर संभावित विचारों में से एक को अपनाया. यह विवाद नारायण देबनाथ की विधवा, जो उनकी वसीयत की निष्पादक के रूप में काम कर रही थीं और उनके एक बेटे द्वारा दायर एक मुकदमे से शुरू हुआ, जिसमें दावा किया गया कि पब्लिशर 2012 के एक समझौते के तहत दी गयी लाइसेंस अवधि के बाद भी लेखक की रचनाओं का फायदा उठा रहा था.

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Published by: Bijay kumar

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