राष्ट्रीय शिक्षा नीति पूरे देश में समान रूप से लागू हो

एनईपी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कुमार ने कहा, "यह नीति यह सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई थी कि हमारे देश में छात्रों को कैसे शिक्षित किया जाए और वे अपना भविष्य कैसे बना सकें.

पूर्व यूजीसी अध्यक्ष की सलाह

कोलकाता. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर एम जगदीश कुमार ने शुक्रवार को कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को आदर्श रूप से पूरे देश में समान रूप से लागू किया जाना चाहिए. विश्वभारती विश्वविद्यालय में विकास 2025 कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से कुमार ने कहा कि भले ही कुछ राज्य इसका नाम बदलकर ””””””””राज्य शिक्षा नीति”””””””” कर दें, लेकिन एनईपी की सिफारिशों और विशेषताओं को पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए. एनईपी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कुमार ने कहा, “यह नीति यह सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई थी कि हमारे देश में छात्रों को कैसे शिक्षित किया जाए और वे अपना भविष्य कैसे बना सकें. भारत अब एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, जो रोजगार के नये अवसर पैदा कर रही है, जिसका अर्थ है कि कुशल पेशेवरों की मांग बढ़ रही है. ” उन्होंने कहा, “लेकिन कई कॉलेज और विश्वविद्यालय छात्रों को इस वास्तविकता के लिए तैयार नहीं कर रहे हैं. वे नौकरी कैसे हासिल करेंगे? ”

श्री कुमार ने कहा, “एनईपी बहु-विषयक शिक्षा, लचीलेपन और भारतीय भाषाओं, संस्कृति और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों के अध्ययन के अवसरों को बढ़ावा देती है. अगर कोई राज्य एनईपी को अपनाने से इनकार करता है, तो उसके छात्र इसे अपनाने वाले राज्यों के छात्रों से पिछड़ जायेंगे. उन्हें दूसरे राज्य में उच्च शिक्षा प्राप्त करने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है. भले ही इसे राज्य शिक्षा नीति नाम दिया जाये, इसे लागू किया जाना चाहिए क्योंकि नाम कोई मायने नहीं रखता.‘उन्होंने कहा- जब एनईपी पूरे देश में लागू हो जायेगी तो सार्वजनिक और निजी दोनों विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक मानकों में उल्लेखनीय सुधार होगा.’

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Author: GANESH MAHTO

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