बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद दुर्गा पूजा समितियों का भी बदला स्वरूप, जानें कैसी है उत्सव की तैयारी

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के साथ दुर्गा पूजा समितियों में भी बदलाव आया है. कई प्रमुख पूजा समितियों का नेतृत्व अब बीजेपी नेताओं के हाथों में आ गयी है. जानिए इस साल की दुर्गा पूजा की खास तैयारियों के बारे में.

Durga Puja 2026: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद दुर्गा पूजा उत्सव का स्वरूप भी इस साल बदला-बदला नजर आ रहा है. राज्य में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 15 साल के शासन के खात्मे के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनी. इसके बाद कोलकाता की प्रमुख दुर्गा पूजा समितियों के नेतृत्व में भी बदलाव हुआ है. टीएमसी से जुड़े कई कद्दावर नेताओं की जगह बीजेपी के विधायकों और मंत्रियों ने पूजा समितियों की कमान संभाल ली है. दुर्गा पूजा 16 से 21 अक्टूबर तक होगी. ‘खूंटी पूजा’ के साथ ही दुर्गा पूजा के लिए पंडाल के निर्माण और कलाकृतियों की तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू हो गयी है.

सुरुचि संघ और श्रीभूमि समेत कई क्लबों में नये चेहरे

कोलकाता की जिन प्रमुख पूजा समितियों के प्रमुख बदले हैं, उनमें सुरुचि संघ, श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब और केंदुआ शांति संघ (पाटुली) शामिल हैं.

  • सुरुचि संघ : पहले तृणमूल के पूर्व मंत्री अरूप विश्वास का यहां वर्चस्व था. अब बीजेपी विधायक सौरभ सिकदर ने संगठन में उनकी जगह ले ली है.
  • श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब : राज्य के पूर्व मंत्री सुजीत बोस से जुड़े इस क्लब से अब राज्य के स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखर्जी जुड़ चुके हैं.
  • केंदुआ शांति संघ (पटुली) : पूर्व टीएमसी पार्षद बप्पादित्य दासगुप्ता की जगह बीजेपी विधायक सरबरी मुखर्जी को मुख्य संरक्षक बनाया गया है.
  • बारानगर लोलैंड सार्वजनिन पूजा समिति : पूर्व टीएमसी नेता प्रदीप नारायण बोस की जगह अब बीजेपी विधायक सजल घोष इस पूजा समिति का नेतृत्व कर रहे हैं.

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राजडांगा नबोदय संघ ने राजनीति से बनायी दूरी

जेल में बंद पूर्व टीएमसी पार्षद सुशांत घोष से जुड़े राजडांगा नबोदय संघ ने इस साल राजनीति से दूर रहने का फैसला किया है. केवल क्लब सदस्यों के साथ पूजा का आयोजन करने का फैसला हुआ है. इसका ध्येय वाक्य ‘शोधन’ (सुधार) रखा गया है.

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राजनीतिक प्रभाव बनाम जन-पहल

कई समितियों में बीजेपी नेताओं को संरक्षक और पदाधिकारी बनाया गया है, लेकिन पार्टी संगठन ने संतुलित रुख अपनाया है. प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा है कि वे किसी भी दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष नहीं बनेंगे. उनका मानना है कि दुर्गा पूजा आम जनता की अपनी पहल होनी चाहिए, न कि राजनीतिक प्रभाव दिखाने का जरिया. हालांकि, वे कॉलेज स्क्वायर की पारंपरिक ‘खूंटी पूजा’ में शामिल हुए. मोहम्मद अली पार्क की ‘खूंटी पूजा’ में मंत्री तापस रॉय विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए.

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बजट और भव्यता में नहीं आयेगी कोई कमी

आयोजकों ने साफ कर दिया है कि राज्य में सरकार और समितियों में नेतृत्व बदलने के बावजूद पूजा के बजट, थीम या भव्यता पर कोई असर नहीं पड़ेगा. संतोषपुर लेक पल्ली समिति से जुड़े सोमनाथ दास ने बताया कि यहां पूजा का बजट लगभग 1 करोड़ रुपए है. जादवपुर के स्थानीय बीजेपी विधायक अब इस समिति से जुड़े हैं. समिति न तो अपने उत्सव का दायरा कम कर रहा है, न अपनी सांस्कृतिक परंपराओं से कोई समझौता कर रहा है.

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By मिथिलेश झा

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