त्रिपुरा : पार्टी कार्यालय पर हुए हमले के बाद अगरतला पहुंचे तृणमूल के प्रतिनिधि

तृणमूल कांग्रेस का पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बुधवार को पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़ के खिलाफ व दल के कार्यकर्ताओं के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए अगरतला पहुंचा, जहां कथित तौर पर भाजपा की युवा शाखा के कार्यकर्ताओं ने पार्टी के एक कार्यालय में तोड़फोड़ की थी.

कोलकाता.

तृणमूल कांग्रेस का पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बुधवार को पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़ के खिलाफ व दल के कार्यकर्ताओं के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए अगरतला पहुंचा, जहां कथित तौर पर भाजपा की युवा शाखा के कार्यकर्ताओं ने पार्टी के एक कार्यालय में तोड़फोड़ की थी. प्रतिनिधिमंडल में तृणमूल की पश्चिम बंगाल इकाई के महासचिव कुणाल घोष, मंत्री बीरबाहा हांसदा, सांसद सायनी घोष, सांसद प्रतिमा मंडल और पार्टी प्रवक्ता सुदीप राहा शामिल थे. तृणमूल की राज्यसभा सदस्य सुष्मिता देव अगरतला हवाई अड्डे पर प्रतिनिधिमंडल में शामिल हुईं. अगरतला आने के बाद तृणमूल नेताओं ने त्रिपुरा पुलिस व भाजपा पर गंभीर आरोप लगाये.

अगरतला एयरपोर्ट पर तृणमूल नेताओं के प्रतिनिधिमंडल के पहुंचने के बाद उन्होंने हवाई अड्डे पर पुलिस द्वारा बाधा देने का आरोप लगाया. इस दौरान तृणमूल नेताओं ने करीब तीन घंटे तक एयरपोर्ट परिसर में धरना दिया. श्री घोष ने आरोप लगाया कि चार गाड़ियों की व्यवस्था होनी थी, लेकिन सिर्फ एक वाहन उपलब्ध कराया गया. जब नेताओं ने प्रीपेड टैक्सी से कार्यालय जाने की कोशिश की, तो उसमें भी रोक लगा दी गयी. पुलिस से लंबी बहस के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला और अंततः तृणमूल नेताओं ने एयरपोर्ट परिसर में ही धरना शुरू कर दिया. करीब तीन घंटे बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया और प्रतिनिधिमंडल के लिए चार गाड़ियों की व्यवस्था की. इसके बाद तृणमूल के नेता अगरतला स्थित अपने पार्टी कार्यालय पहुंचे. वहां उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस की भूमिका और भाजपा पर जमकर निशाना साधा.

तृणमूल नेता कुणाल घोष ने कहा, “त्रिपुरा पुलिस और प्रशासन ने हमारी आवाजाही में बाधा डालने की कोशिश की. यह लोकतंत्र का मजाक है. एक नागरिक और राजनीतिक नेता के रूप में हमें आने-जाने की स्वतंत्रता है. यह अधिकार संविधान ने दिया है. पश्चिम बंगाल में भाजपा नेताओं को कभी ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता. त्रिपुरा के नेता बंगाल में कार्यक्रम करते हैं, विवाह समारोहों में शामिल होते हैं, कोई रोक-टोक नहीं होती, लेकिन हमें यहां रोकने की कोशिश की गयी. क्या उन्हें हमसे डर है? त्रिपुरा में दक्षिण भारतीय फिल्मों जैसा दृश्य था. गाड़ियों के ड्राइवरों को बाहर कर दिया गया, टैक्सी लेने नहीं दी गयी, और जब हम पैदल जाने लगे, तब भी पुलिस ने रोका. आखिर यह लोकतंत्र है या तानाशाही?”

तृणमूल नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने बाद में त्रिपुरा पुलिस के डीजीपी अनुराग धनखड़ से मुलाकात की और पार्टी कार्यालय पर हुए हमले की शिकायत दर्ज करायी. डीजीपी से मुलाकात के दौरान घोष ने मांग की कि तृणमूल नेताओं और कार्यकर्ताओं को उचित सुरक्षा प्रदान की जाये, ताकि वे राजनीतिक और संगठनात्मक कामकाज बिना भय के कर सकें. डीजीपी ने प्रतिनिधिमंडल को हर तरह का सहयोग का आश्वासन दिया है.

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Published by: Bijay kumar

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