दरभंगा महाराज के लिए भारत रत्न की मांग

मिथिला विकास परिषद ने स्वर्गीय दरभंगा महाराज को मरणोपरांत भारत रत्न दिये जाने की मांग की.

कोलकाता. महान राष्ट्रवादी, समाज सुधारक, नारी शिक्षा के प्रबल समर्थक, बाल विवाह विरोधी और देश के प्रथम पंक्ति के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों में शामिल गौरक्षा आंदोलन के नायक रहे दरभंगा महाराज लक्ष्मेश्वर सिंह को उनकी जयंती पर याद किया गया. महानगर के डलहौसी इलाके में स्थित बीबीडी बाग के दक्षिण-पश्चिम कोने में स्थापित उनकी मूर्ति के समक्ष मिथिला विकास परिषद ने संस्था के अध्यक्ष अशोक झा के नेतृत्व में एक सभा का आयोजन किया. आयोजकों ने स्वर्गीय दरभंगा महाराज को मरणोपरांत भारत रत्न दिये जाने की भी मांग की. इस मांग के साथ प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को पत्र भी भेजा गया. ऊपरोक्त मौके पर श्री झा ने अपने संबोधन में कहा कि अपने 40 वर्षीय अप्लकालिक जीवन में ही दरभंगा महाराज लक्षमेश्वर सिंह ने देश, समाज, साहित्य, संस्कृति और उद्योग आदि के हित में अनेक ऐसे कार्य किये, जो उनके समकालीन और समकक्ष दूसरे लोगों से संभव न था और ना ही हुआ. वह समाजिक कुरीतियों के विरुद्ध हमेंशा एक सजग प्रहरी के रूप में खड़े रहे. श्री झा ने कहा कि कोलकाता विश्वविद्यालय में अवस्थित दरभंगा बिल्डिंग, महिला शिक्षा के विकास के लिए कोलकाता के कालीघाट में स्थापित महाकाली महिला पाठशाला आदि शिक्षा के क्षेत्र में उनके अविस्मरणीय योगदान हैं. इतना ही नहीं, बनारस विश्वविधालय (बीएचयू) और अलीगढ़ विश्वविधालय की स्थापना में भी सर्वोच्च आर्थिक मदद के साथ उनका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता.

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By Prabhat Khabar News Desk

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