कल्याणी एम्स में स्कूली छात्रों को सीपीआर का प्रशिक्षण

छह स्कूलों के छात्रों को इस प्रशिक्षण के माध्यम से आपात स्थिति में जीवन बचाने की क्षमता विकसित करने पर जोर दिया गया.

700 से अधिक छात्रों को अचानक हृदयाघात की स्थिति में त्वरित कदम उठाने का प्रशिक्षण

कल्याणी. नदिया जिले के कल्याणी एम्स ने अचानक हृदयाघात (हार्ट अटैक) की स्थिति में कार्डियो-पल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) देने के लिए 700 से अधिक स्कूली छात्रों को प्रशिक्षित किया. छह स्कूलों के छात्रों को इस प्रशिक्षण के माध्यम से आपात स्थिति में जीवन बचाने की क्षमता विकसित करने पर जोर दिया गया.

हृदयाघात में समय पर सीपीआर का महत्व

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा समय पर सीपीआर देने से जीवित रहने की संभावना बढ़ सकती है. सीपीआर के बिना मस्तिष्क क्षति कुछ ही मिनटों में हो सकती है, और हर मिनट की देरी से बचने की संभावना लगभग 10% कम हो जाती है. केवल दबाव वाले सीपीआर से तत्काल बाईस्टैंडर हस्तक्षेप में बचने की संभावना दोगुनी या तिगुनी हो सकती है. हालांकि, भारत में बाईस्टैंडर सीपीआर की दर केवल 1.3% से 9.8% के बीच है, जबकि उच्च आय वाले देशों में यह लगभग 50% है.

सीपीआर जागरूकता सप्ताह और प्रशिक्षण कार्यक्रम

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय 13-17 अक्तूबर, 2025 तक पूरे देश में सीपीआर जागरूकता सप्ताह मना रहा है. इस अवसर पर छात्रों और शिक्षकों को सीपीआर की सही तकनीक, स्वचालित बाहरी डिफिब्रिलेटर (एइडी) का उपयोग और आपातकालीन हेल्पलाइन 112/108 पर कॉल करने का प्रशिक्षण दिया गया. ऑडिटोरियम में आयोजित सामूहिक शपथ समारोह में 700 से अधिक छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने सीपीआर प्रतिज्ञा ली. छात्रों और शिक्षकों द्वारा नुक्कड़ नाटक के माध्यम से आम जनता को त्वरित प्रतिक्रिया के महत्व के बारे में जागरूक किया गया. एम्स कल्याणी इस प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से स्वास्थ्य आपात स्थितियों में समुदाय की क्षमता निर्माण और जीवन बचाने की दिशा में सक्रिय योगदान दे रहा है.

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Author: GANESH MAHTO

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