हाइकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगी जांच की प्रगति रिपोर्ट

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को एक विधि कॉलेज में सामूहिक दुष्कर्म मामले की जांच की प्रगति पर एक हलफनामा दाखिल करने का गुरुवार को निर्देश दिया.

कोलकाता. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को एक विधि कॉलेज में सामूहिक दुष्कर्म मामले की जांच की प्रगति पर एक हलफनामा दाखिल करने का गुरुवार को निर्देश दिया. न्यायमूर्ति सौमेन सेन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य सरकार को 10 जुलाई को मामले की अगली सुनवाई पर उसके समक्ष जांच की केस डायरी भी पेश करने का निर्देश दिया. पीठ में न्यायमूर्ति स्मिता दास डे भी शामिल थीं. गौरतलब है कि साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज में 25 जून की शाम को कानून की एक छात्रा से कथित सामूहिक दुष्कर्म किये जाने के मामले में तीन जनहित याचिकाएं दायर की गयी हैं. मुख्य आरोपी कॉलेज का पूर्व छात्र है और संस्थान का संविदा कर्मचारी भी है. खंडपीठ ने राज्य सरकार से कहा कि वह कानून की छात्रा से जुड़ी इस ‘भयावह घटना’ के संबंध में याचिकाकर्ताओं में से एक द्वारा उठाये गये कुछ प्रश्नों पर सुनवाई की अगली तारीख पर एक रिपोर्ट के रूप में जवाब दे. राज्य से यह पूछा गया है कि कैसे एक पूर्व छात्र को प्रवेश नियंत्रण प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हुए आधिकारिक समय के बाद कॉलेज परिसर में प्रवेश की अनुमति दी गयी और कैसे स्टाफ के सदस्य बिना किसी आधिकारिक उद्देश्य या प्रशासनिक पर्यवेक्षण के, कॉलेज के कामकाजी समय के बाद भी परिसर में मौजूद रहे.

उसे यह भी बताने का निर्देश दिया गया कि कॉलेज भवन में अनाधिकृत प्रवेश को रोकने या उसका पता लगाने के लिए क्या निगरानी या सुरक्षा उपाय किये गये हैं.

याचिकाकर्ता ने यह भी सवाल उठाया कि पीड़िता को दी गयीं धमकियों के बारे में कथित तौर पर सूचित किये जाने के बावजूद कॉलेज प्रशासन और स्थानीय पुलिस ने कार्रवाई क्यों नहीं की.

उन्होंने पूछा : एक प्रतिष्ठित विधि कॉलेज में सीसीटीवी कवरेज और कार्यात्मक सुरक्षा तंत्र जैसे आवश्यक निगरानी बुनियादी ढांचे का अभाव क्यों है, विशेषकर ऐसे समय में जब लैंगिक आधार पर हिंसा बढ़ रही है. एक अन्य याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील फिरोज एडुल्जी ने खंडपीठ से अनुरोध किया कि वह राज्य सरकार से कथित दुष्कर्म मामले में जांचकर्ताओं की केस डायरी पेश करने को कहे, क्योंकि इसमें मामले की जांच के सिलसिले में पुलिस की प्रत्येक गतिविधि का ब्यौरा है.

राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने अदालत के समक्ष कहा कि मामले की जांच कर रही कोलकाता पुलिस ने अब तक मामले की जांच के संबंध में हर आवश्यक कदम उठाया है. तीन याचिकाकर्ताओं में से एक ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) को सामूहिक दुष्कर्म की घटना की प्रारंभिक जांच करने और अदालत के समक्ष अंतरिम रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देने का अनुरोध किया. अन्य याचिकाकर्ता अदालत की निगरानी में जांच और पश्चिम बंगाल के कॉलेजों में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने का अनुरोध कर रहे हैं.

याचिकाकर्ता ने यह दावा किया कि मनोजीत मिश्रा की राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी के साथ नजदीकी है. उन्होंने जनहित याचिका में अनुरोध किया कि कथित सामूहिक दुष्कर्म मामले की निष्पक्ष जांच के लिए यह मामला कोलकाता पुलिस से सीबीआइ को सौंपा जाये. कथित घटना के एक दिन बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी मनोजीत मिश्रा, छात्र प्रमित मुखर्जी और जैब अहमद को गिरफ्तार कर लिया था. बाद में कॉलेज के एक गार्ड को भी गिरफ्तार किया गया. कोलकाता पुलिस ने मामले की जांच के लिए शुरुआत में एक सहायक आयुक्त स्तर के अधिकारी की अगुवाई में एक विशेष जांच दल (एसआइटी) का गठन किया था. जांच बुधवार को जासूसी विभाग को सौंप दी गयी.

पीड़िता के माता-पिता ने पुलिस जांच पर जताया भरोसा

इस बीच, पीड़िता के माता-पिता, जो गुरुवार को ही मामले में पक्षकार बने थे, ने सुनवाई के दौरान खंडपीठ को सूचित किया कि वे अभी सीबीआइ जांच के पक्ष में नहीं हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि फिलहाल उन्हें कोलकाता पुलिस द्वारा की जा रही जांच पर भरोसा है. उन्होंने अपनी याचिका में आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने की मांग की.

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Published by: Akhilesh kumar singh

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