बंकिमचंद्र के ‘वंदेमातरम् भवन’ की बदहाली पर उठा विवाद

1992 में राज्य सरकार ने भवन का अधिग्रहण किया, लेकिन रखरखाव के अभाव में उसकी हालत जर्जर होने लगी.

संरक्षण को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज

हुगली. लोकसभा में ‘वंदेमातरम्’ को लेकर जारी बहस के बीच चुंचुड़ा के जोड़ाघाट स्थित ‘वंदेमातरम् भवन’ की उपेक्षा एक बार फिर सुर्खियों में है. यह वही भवन है, जहां साहित्य सम्राट बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय वर्ष 1876 में डिप्टी मजिस्ट्रेट के रूप में पदस्थापना के दौरान रहते थे और जहां उनकी साहित्य साधना फली-फूली. भवन के सामने स्थापित बंकिमचंद्र का आवक्ष लंबे समय से खुले आसमान के नीचे बिना किसी संरक्षण के पड़ा हुआ था. अंततः चंदननगर पुलिस के कर्मचारी सुकुमार उपाध्याय ने अपने निजी प्रयास से आवक्ष मूर्ति को ढकने और माल्यार्पण के लिए सीढ़ी लगाने का प्रबंध किया.

भवन का ऐतिहासिक महत्व : स्थानीय इतिहासकारों के अनुसार, इसी भवन में बंकिमचंद्र ने ‘आनंदमठ’ रचना के दौरान ‘वंदेमातरम्’ जैसे अमर मंत्र की रचना की थी. उनकी महत्वपूर्ण कृतियां ‘रजनी’, ‘उपकथा’, ‘कृष्णकांत का विल’ और ‘आनंदमठ’ इसी अवधि में प्रकाशित हुईं. 1992 में राज्य सरकार ने भवन का अधिग्रहण किया, लेकिन रखरखाव के अभाव में उसकी हालत जर्जर होने लगी. 1998 में इसका नवीनीकरण कराया गया, किंतु वर्तमान में भवन को पुनः संरक्षण और मरम्मत की आवश्यकता महसूस की जा रही है. वर्षों से यहां संग्रहालय स्थापित किये जाने की मांग भी अधूरी पड़ी है.

हो रही राजनीतिक बयानबाजी

भवन की बदहाली को लेकर राजनीतिक आरोप–प्रत्यारोप भी तूल पकड़ रहे हैं. चुंचुड़ा के तृणमूल विधायक असित मजूमदार ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह ‘वंदेमातरम्’ पर केवल दिखावटी चर्चा कर रही है, जबकि बंकिमचंद्र के वास्तविक आवास की दयनीय स्थिति पर ध्यान नहीं दे रही. उनके अनुसार, यह सब चुनाव पूर्व राजनीतिक प्रदर्शन भर है.

वहीं, भाजपा के हुगली संगठनात्मक जिला अध्यक्ष गौतम चट्टोपाध्याय ने दावा किया कि उनकी पार्टी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री तपन सिकदर के नेतृत्व में इस भवन को बचाने के लिए आंदोलन और अनशन भी किया था.

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Author: GANESH MAHTO

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