सूची में वास्तविक मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करे आयोग

चुनाव आयोग को यह प्रचारित करना चाहिए कि एसआइआर नागरिकता सत्यापित करने की प्रक्रिया नहीं है.

By GANESH MAHTO | October 30, 2025 12:52 AM

भाजपा व तृणमूल भय फैलाने की कर रहीं कोशिशें : विमान बसु कोलकाता. वाममोर्चा ने बुधवार को मांग की कि निर्वाचन आयोग मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के बाद मृत और फर्जी मतदाताओं के नाम हटाने और वास्तविक मतदाताओं के नाम शामिल करना सुनिश्चित करे. हाल ही में राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में एसआइआर की घोषणा के बाद राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीइओ) को ज्ञापन सौंपते हुए वाममोर्चा की तरफ से कहा गया कि आधार, मतदाता पहचान पत्र, जॉब कार्ड और राशन कार्ड को पात्र मतदाता के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए. ज्ञापन में कहा गया है, “चुनाव आयोग को यह प्रचारित करना चाहिए कि एसआइआर नागरिकता सत्यापित करने की प्रक्रिया नहीं है.” ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वालों में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, आरएसपी, एआइएफबी, भाकपा (माले) लिबरेशन और एसयूसीआइ (सी) के नेता शामिल हैं. वाममोर्चा ने दावा किया कि कुछ वर्गों द्वारा लोगों में, विशेषकर पिछड़े वर्गों के बीच एसआइआर के संबंध में भ्रम पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग को जनता के समक्ष इस मुद्दे पर स्पष्टता सुनिश्चित करनी होगी. ज्ञापन में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग को सभी राजनीतिक दलों को एसआइआर के विस्तृत दिशानिर्देश उपलब्ध कराने चाहिए. भारतीय नागरिकों के नाम मतदाता सूची से बाहर नहीं रखे जा सकते. इसमें कहा गया है कि चुनाव आयोग को पश्चिम बंगाल के प्रवासी श्रमिकों के मताधिकार की सुरक्षा के लिए निर्देश देना चाहिए तथा अन्यत्र पढ़ने वाले छात्रों के नाम उनके गृह निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में होने चाहिए. हम चुनाव आयोग से आग्रह करते हैं कि वह राज्य में सही मतदाता सूची के साथ चुनाव सुनिश्चित करे. ज्ञापन सौंपने से पहले यहां एक सभा को संबोधित करते हुए वाममोर्चा के चेयरमैन विमान बसु ने कहा कि देश में 1952 से चुनाव होते रहे हैं, लेकिन इससे पहले कभी इसे लेकर भय का माहौल नहीं बनाया गया. उन्होंने कहा कि आगामी चुनावों को लेकर जिस तरह से लोगों में भय का माहौल पैदा किया जा रहा है, वह अभूतपूर्व और आश्चर्यजनक है. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और पश्चिम बंगाल में सत्तासीन पार्टी मतदाताओं की मदद करने की आड़ में उनमें भय फैलाने की कोशिश कर रही है.

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