साइबर ठगी के खिलाफ सीबीआइ का ‘साइस्ट्राइक’ शुरू

पश्चिम बंगाल समेत देश और विदेश में फैले अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) ने अब तक की सबसे बड़ी और संगठित कार्रवाई शुरू की है.

भारत समेत कई देशों में कुल 35 ठिकानों पर केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकारियों ने की छापेमारी

संवाददाता, कोलकातापश्चिम बंगाल समेत देश और विदेश में फैले अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) ने अब तक की सबसे बड़ी और संगठित कार्रवाई शुरू की है. सीबीआइ ने सोमवार को बताया कि 30 जनवरी को अमेरिका की एफबीआइ सहित यूनाइटेड किंगडम, कुवैत, आयरलैंड और सिंगापुर की जांच एजेंसियों के सहयोग से मल्टीनेशनल ऑपरेशन ‘साइस्ट्राइक’ की शुरुआत की गयी. इस संयुक्त अभियान का उद्देश्य भारत और अन्य देशों से संचालित संगठित, तकनीक-आधारित वित्तीय अपराध नेटवर्क को जड़ से खत्म करना है. इसी क्रम में 30 जनवरी को एक साथ देश के कई हिस्सों में व्यापक छापेमारी अभियान चलाया गया. इस ऑपरेशन के तहत पश्चिम बंगाल सहित नयी दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और तेलंगाना में कुल 35 ठिकानों पर तलाशी ली गयी. जांच में सामने आया कि ये गिरोह फर्जी और छद्म ऑनलाइन पहचान का इस्तेमाल कर अमेरिका, ब्रिटेन, कुवैत, आयरलैंड, सिंगापुर और भारत के नागरिकों को साइबर ठगी का शिकार बना रहे थे. छापेमारी के दौरान सीबीआइ ने नयी दिल्ली से संचालित एक बड़े ट्रांसनेशनल साइबर-आधारित वित्तीय अपराध नेटवर्क का पर्दाफाश किया. यह गिरोह ऑनलाइन माध्यम से विशेष रूप से अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाकर धोखाधड़ी कर रहा था. तलाशी के दौरान लैपटॉप, मोबाइल फोन, कंप्यूटर हार्ड डिस्क सहित कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किये गये, जिनमें अपराध से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मौजूद थे. मौके से इस नेटवर्क के एक सक्रिय सदस्य को गिरफ्तार किया गया है. इसके अलावा, सीबीआइ ने एक अन्य अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का भी खुलासा किया, जो नयी दिल्ली, गाजियाबाद और कर्नाटक से संचालित हो रहा था. यह गिरोह कुवैत की ई-वीजा और वहां की प्रतिष्ठित कंपनियों में नौकरी दिलाने के नाम पर भारतीय नागरिकों से मोटी रकम वसूल रहा था. जांच के दौरान बड़ी संख्या में फर्जी कुवैती ई-वीजा और जॉब ऑफर लेटर से जुड़े डिजिटल दस्तावेज जब्त किये गये. साथ ही एक आरोपी के पास से 60 लाख रुपये नकद भी बरामद हुए. सीबीआइ की जांच में यह भी सामने आया कि यूनाइटेड किंगडम, आयरलैंड और सिंगापुर के नागरिकों को ठगने वाले अलग-अलग साइबर नेटवर्क सक्रिय थे. इन नेटवर्क के जरिए ठगी की रकम म्यूल खातों के माध्यम से भारत में आरोपियों तक पहुंचाई जा रही थी. एजेंसी ने ऐसे सभी खातों की पहचान कर उन्हें निष्क्रिय कर दिया है. सीबीआइ ने संकेत दिये हैं कि मामले में आगे भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं और जांच का दायरा और बढ़ाया जायेगा. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले साइबर अपराध के खिलाफ इस अभियान को भारत की जांच एजेंसियों की महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है.

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