कलकत्ता उच्च न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को बड़ी राहत दी है. न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने दक्षिण 24 परगना जिले के विभिन्न थानों (बिष्णुपुर और रबींद्रनगर) में दर्ज तीन प्राथमिकियों (FIRs) के सिलसिले में बनर्जी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई और गिरफ्तारी पर अंतरिम सुरक्षा बढ़ा दी है. अदालत ने निर्देश दिया है कि पुलिस जांच जारी रख सकती है, लेकिन अंतरिम आदेश के तहत सांसद के खिलाफ कोई भी कठोर या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जायेगी.
कोर्ट ने कहा- बंगाल में बदली राजनीतिक स्थिति
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक स्थिति बदल चुकी है. मौजूदा माहौल को देखते हुए याचिकाकर्ता की कस्टोडियल पूछताछ (हिरासत में लेकर पूछताछ) की फिलहाल कोई आवश्यकता प्रतीत नहीं होती है.
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थानों में दर्ज मामलों को दी गयी चुनौती
अभिषेक बनर्जी ने जुलाई में दर्ज इन आपराधिक मुकदमों को ‘राजनीतिक रूप से प्रेरित’ बताते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट में रद्द (Quash) करने की याचिका दायर की थी. अभियोजन पक्ष के वकील अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) राजदीप मजूमदार ने अदालत से तृणमूल कांग्रेस (All India Trinamool Congress) के सांसद बनर्जी को कोई सुरक्षा न देने का आग्रह किया. उन्होंने दावा किया कि याचिकाकर्ता बेहद प्रभावशाली व्यक्ति हैं और जांच को प्रभावित कर सकते हैं. हालांकि, कोर्ट ने इस दलील पर सवाल उठाते हुए राहत जारी रखी.
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कुल 16 एफआईआर लंबित
सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाईकोर्ट को सूचित किया गया कि अभिषेक बनर्जी के खिलाफ विभिन्न पुलिस थानों में कुल 16 प्राथमिकियां दर्ज हैं. इनमें से अधिकांश मामलों में उन्हें पूर्व के अदालती आदेशों के तहत पहले से ही अंतरिम छूट और राहत प्राप्त है. मामले की अगली विस्तृत सुनवाई अदालत की निर्धारित तिथि के अनुसार आगे बढ़ेगी.
