बंगाल चुनाव 2026: हाईकोर्ट का मतगणना प्रक्रिया में दखल देने से इनकार, टीएमसी की याचिकाएं खारिज

Calcutta High Court Judgment on Counting: कलकत्ता हाईकोर्ट ने बंगाल चुनाव की मतगणना से जुड़ी टीएमसी की 2 याचिकाओं को खारिज किया. कोर्ट ने केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति और मतगणना केंद्रों की शिफ्टिंग को सही ठहराया है. पढ़ें जस्टिस कृष्ण राव का विस्तृत फैसला.

Calcutta High Court Judgment on Counting: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की मतगणना से ठीक पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) को बड़ा झटका दिया है. अदालत ने मतगणना केंद्रों में बदलाव और केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली 2 अलग-अलग याचिकाओं को खारिज कर दिया है. जस्टिस कृष्णा राव की एकल पीठ ने बृहस्पतिवार को स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया के बीच में अदालत का हस्तक्षेप उचित नहीं है. इन फैसलों के बाद अब 4 मई को होने वाली मतगणना का रास्ता साफ हो गया है.

केस 1: मतगणना केंद्र शिफ्ट करने पर मुहर

पहली याचिका (WPA 10464 of 2026) कस्बा विधानसभा क्षेत्र के उम्मीदवार जावेद अहमद खान की ओर से दायर की गयी थी. इसमें गीतांजलि स्टेडियम से विहारीलाल कॉलेज मतगणना केंद्र शिफ्ट करने को चुनौती दी गयी थी.

अदालत का फैसला : कोर्ट ने अपने 6 पेज के जजमेंट में कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर के पास विशेष परिस्थितियों में मतगणना केंद्र बदलने का अधिकार है. चुनाव आयोग ने प्रशासनिक नियंत्रण और सुरक्षा कारणों से मतगणना केंद्रों को जिला मुख्यालयों के पास रखने की नीति बनायी है. विहारीलाल कॉलेज में शिफ्टिंग इसी केंद्रीकृत व्यवस्था का हिस्सा है, जिसमें कुछ भी गलत नहीं है.

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केस 2: केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति को हरी झंडी

दूसरी याचिका (WPA 10488 of 2026) अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) द्वारा दायर की गयी थी. इसमें प्रत्येक टेबल पर कम से कम एक केंद्रीय सरकारी/PSU कर्मचारी को काउंटिंग सुपरवाइजर या असिस्टेंट नियुक्त करने के आदेश को चुनौती दी गयी थी.

अदालत का फैसला : कलकत्ता हाईकोर्ट ने टीएमसी की आशंकाओं को खारिज करते हुए याचिका को मेरिट के आधार पर खारिज कर दिया. 14 पेज के जजमेंट में कोर्ट ने कहा कि काउंटिंग स्टाफ की नियुक्ति करना चुनाव आयोग का विशेषाधिकार है. यह मानना असंभव है कि केवल केंद्रीय कर्मचारी होने से निष्पक्षता प्रभावित होगी, क्योंकि पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी और माइक्रो ऑब्जर्वर की निगरानी में होती है.

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Calcutta High Court Judgment on Counting: हाईकोर्ट के जजमेंट की प्रमुख बातें

  1. मतगणना के लिए राज्य या केंद्र सरकार के कर्मचारियों को चुनना चुनाव आयोग का अधिकार क्षेत्र है.
  2. उम्मीदवारों को मतगणना केंद्र बदलने की सूचना ई-मेल के जरिये दी गयी थी, जो नियमों के अनुकूल है.
  3. सीसीटीवी निगरानी और विभिन्न पार्टियों के काउंटिंग एजेंटों की उपस्थिति में धांधली की आशंका निराधार है.
  4. यदि याचिकाकर्ता को मतगणना के दौरान किसी गड़बड़ी का प्रमाण मिलता है, तो वह चुनाव के बाद इलेक्शन पिटीशन दायर करने के लिए स्वतंत्र है.
  5. सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे मामलों में कानून के प्रश्न को खुला रखा है, इसलिए हाईकोर्ट ने मौजूदा मिसाल (Precedence) का पालन किया.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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