खास बातें
Bulldozer Action in Kolkata: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता और इसके उपनगरीय इलाकों में पिछले 24 घंटों के भीतर कोलकाता नगर निगम (KMC) और रेलवे प्रशासन ने मिलकर अवैध निर्माणों और अतिक्रमण के खिलाफ अभियान छेड़ दिया है. इस अभियान ने डेढ़ दशक से चल रहे प्रमोटर-सिंडिकेट-नेता के गठजोड़ की नींव हिला दी है. दमदम स्टेशन पर आधी रात को हॉकर्स के साम्राज्य को उजाड़ दिया गया, तो महानगर की संकरी गलियों में नियमों को ठेंगा दिखाकर खड़ी की गयी 3,000 अवैध इमारतों पर भी बुलडोजर चलाने की तैयारी कर ली गयी है.
दमदम में मलबे में तब्दील हुई रोजी-रोटी
शनिवार की आधी रात जब शहर गहरी नींद में था, तब दमदम जंक्शन स्टेशन रणक्षेत्र में बदल गया. रेलवे और स्थानीय प्रशासन ने भारी पुलिस बल और आरपीएफ (RPF) के साथ मिलकर एक गुप्त ऑपरेशन शुरू किया. प्लेटफॉर्म से लेकर स्टेशन की बाहरी सड़कों तक जमी वर्षों पुरानी दुकानों को मलबे में बदल दिया गया. रविवार को जब दुकानदार वहां पहुंचे, तो मलबे के सिवाय कुछ नहीं था. कई हॉकर टूटी तराजू और बिखरा सामान समेटते हुए फूट-फूटकर रोते नजर आये.
कोलकाता में 1,000 इमारतों पर गिर सकती है गाज
दमदम की कार्रवाई महज ट्रेलर थी. असली फिल्म महानगर कोलकाता की अवैध बहुमंजिली इमारतों पर चलने वाली है. केएमसी के बिल्डिंग विभाग ने गार्डेनरीच, मटियाबुर्ज, बड़ाबाजार, तिलजला, कसबा और तपसिया जैसे इलाकों को ‘रेड जोन’ घोषित किया है. निगम के सर्वे में 3,000 अवैध निर्माणों की पहचान की गयी है, जिनमें से 1,000 को ढाहने की कानूनी प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है.
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Bulldozer Action in Kolkata: सिंडिकेट का खेल बेनकाब
जांच में खुलासा हुआ है कि प्रमोटर जी+4 का नक्शा पास कराकर जी+6 या जी+7 मंजिलें खड़ी कर देते थे. इन अवैध मंजिलों से करोड़ों की काली कमाई की गयी और घटिया निर्माण सामग्री की आपूर्ति स्थानीय प्रभावशाली तत्वों द्वारा की गयी.
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सत्ता परिवर्तन के बाद बैकफुट पर सफेदपोश संरक्षक
पूर्ववर्ती सरकार के दौरान जिन हॉकर्स और प्रमोटरों को राजनीतिक संगठनों का संरक्षण प्राप्त था, वे अब खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. रेलवे और नगर निगम अब किसी भी राजनीतिक दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है. अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा और शहरी नियोजन से खिलवाड़ करने वाली किसी भी ‘अवैध’ ईंट को बख्शा नहीं जायेगा.
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आम आदमी की चिंता : आशियाना भी गया और पैसा भी?
निगम की इस कार्रवाई से उन मध्यमवर्गीय परिवारों की नींद उड़ गयी है, जिन्होंने अपनी जिंदगी भर की कमाई इन फ्लैटों में लगा दी है. प्रमोटरों ने तो अवैध फ्लैट बेचकर अपना मुनाफा जेब में डाल लिया, लेकिन अब बुलडोजर की आहट ने मासूम खरीदारों को संकट में डाल दिया है.
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