मुख्य बातें
Bengal News : कोलकाता/आसनसोल. व्यवसायी समिति के सदस्यों का आरोप है कि भाजपा समर्थक बताकर कुछ लोग अचानक समिति कार्यालय पहुंच गये और कब्जे की कोशिश करने लगे. विरोध करने पर व्यवसायी समिति के पदाधिकारियों और कारोबारियों के साथ मारपीट की गयी. इस दौरान समिति के महासचिव सागर साहा पर भी हमला किये जाने का आरोप है. घटना के बाद मौके पर कोकओवन थाने की पुलिस और केंद्रीय बल पहुंचा.
सेन मार्केट अनिश्चितकाल के लिए बंद
मौके पर भीड़ को नियंत्रित करने और हालात संभालने के लिए केंद्रीय बल को लाठीचार्ज करना पड़ा. इसके बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया. घटना से नाराज व्यवसायी समिति ने माइकिंग कर ऐलान किया कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक दुर्गापुर का सेन मार्केट अनिश्चितकाल के लिए बंद रहेगा. इससे बाजार के हजारों छोटे-बड़े व्यापारियों के सामने संकट खड़ा हो गया है.
व्यवसायी समिति कोई राजनीतिक संगठन नहीं
व्यवसायी समिति के महासचिव सागर साहा ने मीडिया के समक्ष कहा, “हमने भाजपा को वोट देकर सत्ता में लाया. अब अगर भाजपा के नाम पर ही हम पर दबाव बनाया जायेगा और हमला होगा, तो आम व्यवसायी खुद को सुरक्षित कैसे महसूस करेंगे? बाजार व्यवसायी समिति कोई राजनीतिक संगठन नहीं है. यहां सभी दलों के लोग हैं. फिर इस तरह का हमला क्यों हुआ?” इधर, भाजपा नेतृत्व शुरू से ही कार्यकर्ताओं को संयम बरतने का संदेश देता रहा है. राज्य अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने साफ कहा है कि भाजपा सरकार में ‘दादागिरी’ नहीं, बल्कि कानून का शासन चलेगा.
50 भाजपा कार्यकर्ताओं को कारण बताओ नोटिस
हाल ही में वोट बाद हिंसा के आरोप में 50 भाजपा कार्यकर्ताओं को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था. हालांकि, दुर्गापुर पश्चिम से भाजपा विधायक लक्ष्मण घोड़ुई ने घटना को लेकर अलग ही दावा किया. उन्होंने कहा, “इस तरह की घटना किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जायेगी. कुछ तृणमूल समर्थक रातोंरात भाजपा में शामिल होकर पार्टी का नाम खराब करने और इलाके में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं. मैंने पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने को कहा है.”
पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
विधायक ने यह भी कहा कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन बाजार बंद रहने से आम व्यापारियों को नुकसान होगा. इसलिए व्यवसायी समिति से बाजार खोलने की भी अपील की जायेगी. घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे हैं कि क्या सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा में तेजी से हुई ‘नयी एंट्री’ अब संगठन के लिए चुनौती बनती जा रही है. वहीं, विपक्ष इसे “भेजाल भाजपा” का असर बताकर हमला बोल रहा है.
Also Read: डीए बैठक में केवल चार कर्मचारी संगठनों को बुलावा, बंगाल सरकार पर लगे ‘भेदभाव’ के आरोप
