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Bengal Election: नयी दिल्ली/कोलकाता. सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची में पांच से सात लाख मतदाताओं के नाम जोड़े जाने का उल्लेख किये जाने पर सोमवार को कहा कि हम अनुमानों के आधार पर जांच नहीं करा सकते. वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया. पश्चिम बंगाल में दो चरण में मतदान होगा. पहले चरण में 23 अप्रैल को, जबकि दूसरे चरण में 29 अप्रैल को वोट डाले जायेंगे. मतगणना चार मई को होगी.
सात लाख के करीब जोड़े गये नये नाम
गुरुस्वामी ने मीडिया में आयीं खबरों का हवाला देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में फॉर्म-6 का उपयोग करके पांच से सात लाख मतदाताओं के नाम जोड़े गये हैं. पहली बार किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में जोड़ने या फिर किसी मतदाता का नाम एक निर्वाचन क्षेत्र से दूसरे निर्वाचन क्षेत्र में स्थानातंरित करने के लिए फॉर्म-6 का उपयोग किया जाता है. गुरुस्वामी ने कहा कि कट-ऑफ तिथि के बाद मतदाता सूची में फॉर्म-6 के जरिये किसी मतदाता का नाम जोड़ने की अनुमति नहीं है. उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम जोड़े जाने से राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव में प्रभाव पड़ सकता है.
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वोटर लिस्ट का अंतिम आंकड़ा आना अभी बाकी
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि आप इसे चुनौती दें, हम गौर करेंगे. गुरुस्वामी ने कहा कि उनके पास पर्याप्त जानकारी नहीं है और अंतिम मतदाता सूची अभी जारी नहीं हुई है. प्रधान न्यायाधीश ने कहा : हम अनुमान के आधार पर जांच नहीं करा सकते. हम इस तरह (मामले पर) विचार नहीं कर सकते. सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) से संबंधित कई याचिकाओं पर पहले से ही सुनवाई कर रही है.
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