बंगाल के रण में शाह का दांव, क्या बैकफुट पर हैं ममता दीदी?

विक्रम उपाध्याय Bengal Election: पहले चरण के चुनाव के बाद बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बौखलाई सी लग रही हैं. 90 फीसदी से अधिक मतदान कुर्सी वापस दिलाने में सहायक होगा या कुर्सी छीनने में, यह तो 4 मई को पता चलेगा, लेकिन टीएमसी को यह तो पता चल गया है कि बंगाल के हिंदुओं ने भी इस बार बढ़-चढ़ कर अपने वोट डाले हैं, और इसको सत्तारूढ़ पार्टी अपने लिए खतरा मान रही है.

Bengal Election: 24 अप्रैल को ममता बनर्जी ने अपना डर जाहिर भी किया, उन्होंने कहा कि बीजेपी, लोगों को बांटने वाला एजेंडा थोपने की कोशिश कर रही है. यानि बंगाल के चुनाव का ध्रुवीकरण हो चुका है. यह 15 साल के मुस्लिम तुष्टीकरण के खिलाफ जनता का जवाब भी सो सकता है.

मोदी-शाह की जोड़ी से ममता परेशान

साफ लग रहा है कि बंगाल की मुख्यमंत्री केंद्रीय बीजेपी नेताओं, खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के लगातार चुनावी अभियानों से परेशान हैं. ये दोनों नेता, बंगाल में घुसपैठ, अराजकता, गुंडागर्दी, महिला असुरक्षा और बेरोजगारी के मुद्दे पर टीएमसी को घेर रहे हैं, और बंगाल के लोग इन्हें पसंद भी कर रहे हैं. पहली बार लोग सरकार के खिलाफ मुखर होकर बोल रहे हैं. जनता की निडरता ही बताती है कि लोग परिवर्तन की अपेक्षा कर रहे हैं.

बंगाल में केंद्रीय बलों ने संभाला मोर्चा, निडर होकर वोट डाल रहे वोटर

चुनाव के बाद टीएमसी के लोग हर बार बीजेपी के कार्यकर्त्ताओं पर हमले कर देते थे, उनके घर जला देते थे. यहां तक कि बीजेपी के लोगों की हत्या भी कर देते थे. पर इस बार गृह मंत्री बंगाल में जमे हुए हैं. पर्याप्त संख्या में केंद्रीय बलों के जवान भी सुरक्षित चुनाव कराने के लिए बंगाल में तैनात हैं. गृहमंत्री ने यह ऐलान भी कर दिया है कि 28 अप्रैल के बाद यदि किसी ने भी किसी मतदाता पर हमला किया तो उसे बंगाल की खाड़ी में फिकवा देंगे. उन सभी लोगों के लिए अमित शाह द्वारा दी जा रही सुरक्षा की यह गारंटी अपनी पसंद के उम्मीदवार को निडर होकर वोट देने के लिए प्रेरित करेगी.

तृणमूल सरकार के खिलाफ बंगाल की जनता में तेजी से फैल रहा अविश्वास

साफ है कि पश्चिम बंगाल की राजनीतिक लड़ाई अब आर पार पर आ गई है. एक तरफ ममता बनर्जी हैं, तो दूसरी तरफ बीजेपी अमित शाह की अगुआई में उनको कड़ी टक्कर दे रही है. अमित शाह यह दावा कर रहे हैं कि 170 सीटें जीत कर बंगाल में बीजेपी सरकार बनाने जा रही है. बीजेपी के विश्वास का कारण, तृणमूल सरकार के प्रति बंगाल की जनता में तेजी से फैल रहा अविश्वास है. पिछले 15 सालों में तृणमूल ने जनता की आधारभूत जरूरतों पर ध्यान ही नहीं दिया. केवल मुस्लिम तुष्टीकरण और भय के बल पर शासन किया. अब इन्हीं मुद्दों पर जनता सरकार से मुखर होकर सवाल कर रही है और उम्मीद से बीजेपी की ओर देख रही है.

शाह जनता के मुद्दे को सीधे उठा रहे

गृहमंत्री अमित शाह ने तृणमूल के प्रति जनाक्रोश को देखते हुए बीजेपी का संकल्प पत्र तैयार करवाया है. वह जनता के मुद्दे को सीधे उठा रहे हैं. वह रोड शो कर रहे हैं. रैलियां कर रहे हैं. पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं. पार्टी में किसी तरह की कोई आपसी रंजिश ना बचे, इसके लिए सभी असन्तुष्ट नेताओं को खुद ही फोन कर आवश्यक निर्देश दे रहे हैं.

बंगाल के लोग चाहते हैं बदलाव

अमित शाह का हर प्रयोग सफल हो रहा है. रोडशो के पीछे चल रहा जुलूस, मिलों लंबा दिख रहा है. भीड देखकर राजनीतिक टिप्पणीकार भी कहने लगे हैं कि बंगाल के लोगों का पीएम नरेंद्र मोदी के प्रति प्यार और विश्वास काफी बढ़ गया है, यह दिख रहा है कि बंगाल के लोग बदलाव चाहते हैं. अमित शाह कहते हैं – लोग बंगाल में इसलिए बदलाव चाहते हैं कि यहां राजनीतिक हिंसा रुके, जबरन वसूली बंद हो और बांग्लादेशी घुसपैठिये वापस भेजे जाएं. तृणमूल ने पिछले 15 वर्षों के अपने कार्यकाल में प्रशासन का पूरी तरह राजनीतिकरण कर दिया है, बंगाल में राजनीति का अपराधीकरण हो गया है और संस्थागत भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया गया है. राजनीति के अपराधीकरण के चलते, बंगाल में 300 से ज्यादा BJP कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई है और उनकी मौत की जांच में कोई प्रगति नहीं हुई है.

अवैध घुसपैठियों को देश से बाहर भेजने का शाह ने किया वादा

गृह मंत्री ने यह ऐलान कर दिया है कि एसआईआर प्रक्रिया के जरिए जिन अवैध घुसपैठियों की पहचान हुईं है, उन्हें संवैधानिक प्रक्रिया अपनाकर देश से बाहर भी भेजा जाएगा. पार्टी के सत्ता में आने के 45 दिनों के भीतर घुसपैठ रोकने के लिए सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन भी उपलब्ध करा दी जाएगी. उन्होंने यह भी वादा किया है कि संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत बंगाल में समान नागरिक कानून लाया जाएगा. ताकि विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों में मनमानी को नियंत्रित किया जा सके, जबकि टीमसी समान नागरिक संहिता का लगातार विरोध करती चली आ रही है.

बंगाल में 42 प्रतिशत अनुसूचित जाति और जनजाति के लोग गरीबी रेखा से नीचे

तृणमूल की मजहबी राजनीति के कारण सबसे ज्यादा पिछड़े वर्गों , दलितों और आदिवासियों को परेशानी उठानी पड़ी है. उनकी जमीनें छीनी गई, उन्हें हिंसा का शिकार होना पड़ा और उनकी बहु बेटियों को तृणमूल के गुंडों के हाथों प्रताड़ित होना पड़ा. 2018 में लोढ़ा और शबर जाति के 10 लोग भूख से मर गए. 2021 के सरकारी आकड़े के अनुसार बंगाल के 44 प्रतिशत आदिवासी और 37 प्रतिशत दलित स्कूल से वंचित रहे. ममता बनर्जी के राज में 42 प्रतिशत अनुसूचित जाति और जनजाति के लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं.

बंगाल में महिलाओं के प्रति उत्पीड़न की घटनाएं देश में सबसे अधिक

बंगाल में महिला मुख्यमंत्री होने के बजाय महिलाओं के प्रति उत्पीड़न की घटनाएं देश में सबसे अधिक है. गृह मंत्री चुनावी सभाओं में इन घटनाओं पर अपनी वेदना व्यक्त करने के साथ यह वादा भी कर रहे हैं बीजेपी की सरकार बनने के बाद टीमसी के गुंडों पर तुरंत कारवाई करेंगे. बंगाल की महिलाएं गृह मंत्री की बातों को संजीदगी से ले रही हैं. संदेशखाली कांड , दुर्गापुर मेडिकल कॉलेज में बलात्कार, आर जी कर में बलात्कार और हत्या, कोलकाता लॉ कॉलेज में महिलाओं पर अत्याचार जैसी घटनाएं नारी शक्ति को तृणमूल से दूर ले जा चुकी हैं. और ममता बनर्जी यह कहती हैं कि महिलाओं को शाम 7 बजे के बाद घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए. अमित शाह ने इसे मुख्यमंत्री की बेशर्मी करार देते हुए महिलाओं को पूर्ण सुरक्षा की गारंटी दी है. आरजी कर रेप-मर्डर की पीड़ित की मां को टिकट देना और फिर प्रधानमंत्री का उनके लिए चुनाव प्रचार करने जाना यह संदेश देने में सफल है कि बीजेपी पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है. पार्टी ने यह वादा भी किया है कि सरकारी नौकरियों में 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी.

बंगाल का मुख्यमंत्री इसी धरती का बेटा और बांग्ला भाषा बोलने वाला होगा

टीमसी यह प्रचार करने में जुटी है कि बीजेपी बाहरी लोगों को लाकर बंगाल में बिठाएगी और बंगाल की संस्कृत दूषित कर देगी, लेकिन अमित शाह ने एक नहीं कई बार यह स्पष्ट कर दिया है कि बंगाल का मुख्यमंत्री इसी धरती का बेटा और बांग्ला भाषा बोलने वाला होगा.

अमित शाह की रणनीति से तृणमूल के लोग घबराए

अमित शाह की रणनीति से तृणमूल के लोग घबराएं हुए हैं. अब बीजेपी नेताओं, केंद्रीय पर्यवेक्षकों और ज़िला पदाधिकारियों की पहुंच बंगाल के हर घर तक हो गई है. मजबूत बूथ, कार्यकर्ताओं के बढ़े मनोबल, जबरदस्त आपसी तालमेल ने तृणमूल की धमकी वाली राजनीति को कुंद कर दी है. अमित शाह ने अपनी रणनीति में उन मजबूत गढ़ों को और मजबूत करना शामिल किया है, जहां बीजेपी सफल रही थी, पर साथ में उन विधानसभा सीटों पर भी ज़ोरदार तैयारी चल रही है जहां 2021 में बहुत कम अंतर से हार मिली थी. ममता बनर्जी का बीजेपी को बाहरी बताकर बंगाल बचाने का नारा अब फेल हो गया है. वह खुद को बचाने की अब लड़ाई लड़ रही हैं. उनकी यह घोषणा कि चुनाव के बाद वह दिल्ली कूच करेंगी, उनके मैदान छोड़ने की ओर ही संकेत करता है.

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By विक्रम उपाध्याय

विक्रम उपाध्याय is a contributor at Prabhat Khabar.

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