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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मतदाताओं को चुनाव आयोग ने बड़ी राहत का देने का ऐलान किया है. अब मतदाताओं को न तो वोटर स्लिप डाउनलोड कर प्रिंट निकालने की जरूरत होगी और न ही इसके लिए राजनीतिक दलों के स्थानीय नेताओं पर निर्भर रहना पड़ेगा. इस बार बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) खुद मतदाताओं के घर जाकर वोटर स्लिप वितरित करेंगे. यह फैसला सीईओ कार्यालय की सिफारिश पर निर्वाचन आयोग ने लिया है.
2011 के बाद से बंगाल में खत्म है वोटर स्लिप डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम
पश्चिम बंगाल सीईओ कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि चुनाव प्रक्रिया के नियमों के तहत वोटर स्लिप का वितरण बीएलओ की जिम्मेदारी है. हालांकि, वर्ष 2011 के बाद से बंगाल में यह व्यवस्था लगभग खत्म हो गयी थी. अब आयोग इस व्यवस्था को फिर से सख्ती से लागू करने जा रहा है.
वोटर स्लिप डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में आयेगी ट्रांसपेरेंसी
अधिकारी ने कहा कि इस कदम से न केवल मतदाताओं को सुविधा होगी, बल्कि वोटर स्लिप डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम भी ट्रांसपेरेंट होगी. यदि किसी मतदाता को वोटर स्लिप नहीं मिलती है, तो वह संबंधित बीएलओ से सीधे कॉन्टैक्ट करके स्लिप प्राप्त कर सकेगा.
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आयोग ने तीसरी बार बंगाल सरकार को लिखी चिट्ठी
इस बीच, चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को एक बार फिर पत्र लिखकर वोटर लिस्ट स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) का काम कर रहे बीएलओ, ईआरओ और एईआरओ का लंबित मानदेय तुरंत जारी करें. यह इस मामले में आयोग की तीसरी चिट्ठी है. इससे पहले अगस्त और दिसंबर में भी राज्य सरकार को इस संबंध में आयोग ने चिट्ठी लिखी थी.
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