अब रामकृष्ण परमहंस पर ममता बनर्जी बनाम नरेंद्र मोदी, X पर छिड़ी जंग

Bengal Chunav 2026: ‘बंकिम दा’ के बाद अब ‘स्वामी रामकृष्ण परमहंस’ पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बड़ा बवंडर खड़ा कर दिया है. ममता बनर्जी ने रामकृष्ण परमहंस के नाम के आगे ‘स्वामी’ लगाने पर उनकी आलोचना की. जवाब भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल के चीफ अमित मालवीय ने टीएमसी चीफ का पुराना वीडियो शेयर करके दिया. इसमें ममता बनर्जी ने श्रीकृष्ण को श्रीकृष्ण परमहंस देव कह दिया था.

Bengal Chunav 2026: पश्चिम बंगाल में राम और कृष्ण के बाद अब रामकृष्ण परमहंस के बहाने राजनीतिक दल अपने विरोधियों को साधने में जुट गये हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामकृष्ण परमहंस की जयंती पर सोशल मीडिया पोस्ट में ‘स्वामी’ कहकर संबोधित किया, तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पीएम की बखिया उधेड़ दी. पीएम पर हमला हुआ, तो भारतीय जनता पार्टी ने भी ममता बनर्जी का एक पुराना वीडियो X पर पोस्ट किया, जिसमें ममता बनर्जी कह रहीं हैं कि गीता में श्रीकृष्ण परमहंस देव ने कहा था कि धर्म का अर्थ है धारण करना. धर्म का मतलब मानवता, पवित्रता. धर्म का मतलब विद्वेष नहीं.

पीएम मोदी की ममता बनर्जी ने की आलोचना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ट्वीट के बाद उनकी आलोचना करते हुए ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने राज्य की ‘महान हस्तियों के प्रति सांस्कृतिक असंवेदनशीलता’ दिखायी है. तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में ‘स्वामी’ लिखा है, जबकि रामकृष्ण परमहंस को ‘ठाकुर’ कहकर संबोधित किया जाता है.

ममता बनर्जी ने एक्स पर लिखा- फिर से स्तब्ध!

ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा- फिर से स्तब्ध! एक बार फिर हमारे प्रधानमंत्री ने बंगाल की महान हस्तियों के प्रति अपनी सांस्कृतिक असंवेदनशीलता को आक्रामक ढंग से पेश किया है. आज युगावतार रामकृष्ण परमहंस देव की जन्मतिथि है. ममता बनर्जी ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री ने बंगाल के महापुरुष के नाम के साथ एक अप्रत्याशित और अनुचित शब्द ‘स्वामी’ जोड़ दिया.

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पीएम मोदी ने रामकृष्ण परमहंस को दी श्रद्धांजलि

पीएम मोदी ने रामकृष्ण परमहंस की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी और कहा कि उनके महान विचार सदा प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे. रामकृष्ण परमहंस का जन्म 1836 में हुआ था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया- स्वामी रामकृष्ण परमहंस जी को उनकी जन्म-जयंती पर आदरपूर्ण श्रद्धांजलि. उन्होंने अध्यात्म और साधना को जिस प्रकार जीवनशक्ति के रूप में स्थापित किया, वह हर युग में मानवता का कल्याण करता रहेगा. उनके सुविचार और संदेश सदैव प्रेरणापुंज बने रहेंगे.

दक्षिणेश्वर काली मंदिर में पुजारी थे रामकृष्ण परमहंस

रामकृष्ण परमहंस ने कोलकाता के दक्षिणेश्वर काली मंदिर में पुजारी के रूप में सेवा की. वह सर्वधर्म समन्वय एवं उनके सामंजस्य पर अपने उपदेशों के लिए जाने जाते हैं. ममता बनर्जी ने कहा- रामकृष्ण को श्रद्धा से ठाकुर (ईश्वर के समान) कहा जाता था. उनके निधन के बाद उनके संन्यासी शिष्यों ने रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन की स्थापना की. भारतीय परंपरा के अनुसार उन संन्यासियों को ‘स्वामी’ कहा गया. लेकिन, रामकृष्ण परमहंस को ठाकुर के रूप में ही संबोधित किया जाता रहा.

Bengal Chunav 2026: स्वामी शब्द का प्रयोग रामकृष्ण के शिष्यों के लिए होता है – ममता

ममता बनर्जी ने आगे कहा कि ‘स्वामी’ शब्द रामकृष्ण परमहंस के शिष्यों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, न कि उनके लिए. बंगाल की चीफ मिनिस्टर ने कहा- रामकृष्ण संप्रदाय में ‘स्वामी’ शब्द उनके शिष्यों के लिए होता है; लेकिन संप्रदाय की पवित्र त्रिमूर्ति ठाकुर-मां-स्वामीजी हैं. यहां ‘ठाकुर’ श्री श्री रामकृष्ण परमहंसदेव हैं, ‘मां’ मां शारदा हैं और ‘स्वामीजी’ स्वामी विवेकानंद हैं.

‘बंकिम दा’ के संबोधन पर भी ममता बनर्जी ने बोला था हमला

ममता बनर्जी से प्रधानमंत्री मोदी से अनुरोध किया कि वह बंगाल की महान हस्तियों के लिए ‘नये संबोधन’ गढ़ने से परहेज करें. इससे पहले भी उन्होंने पिछले साल दिसंबर में लोकसभा में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर संसद में हुई चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को ‘बंकिम दा’ कहकर संबोधित करने के कारण उनकी आलोचना की थी.

सौगत राय के आग्रह को पीएम मोदी ने किया था स्वीकार

तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने ‘दा’ संबोधन के प्रयोग पर आपत्ति जतायी थी. उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया था कि वे बंकिम दा की बजाय ‘बंकिम बाबू’ कहकर संबोधित करें. प्रधानमंत्री मोदी ने इसे तुरंत स्वीकार किया और कहा- मैं बंकिम ‘बाबू’ कहूंगा. धन्यवाद, मैं आपकी भावनाओं का सम्मान करता हूं.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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