खास बातें
Bamboo Fencing Polling Booths| कोलकाता, कुंदन झा : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को निष्पक्ष और ‘लीक-प्रूफ’ बनाने के लिए चुनाव आयोग ने अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम करने के निर्देश दिये हैं. आयोग की उन मतदान केंद्रों पर विशेष नजर है, जहां पक्की चहारदीवारी (बाउंड्री वॉल) नहीं है.
मतदानकर्मियों के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ वाली आचार संहिता
ऐसे बूथों पर बाहरी तत्वों और अनधिकृत लोगों की घुसपैठ रोकने के लिए अब अस्थायी बांस की घेराबंदी की जायेगी. इसके साथ ही, चुनाव आयोग ने मतदानकर्मियों के लिए भी ‘जीरो टॉलरेंस’ वाली आचार संहिता जारी की है. इसमें राजनीतिक दलों से दूरी बनाये रखने के सख्त आदेश दिये गये हैं.
जंगल और खुले मैदान वाले बूथों पर कड़ी नजर
आयोग की जांच में यह बात सामने आयी है कि बंगाल के कई मतदान केंद्र स्कूल भवनों में हैं, लेकिन उनकी कोई बाउंड्री नहीं है. बिना बाउंड्री वाले बूथों पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के जवानों की नजर से बचकर बाहरी लोगों के घुसने का डर बना रहता है.
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Bamboo Fencing Polling Booths: जंगल में बने बूथ की सुरक्षा
कई बूथ सुदूर जंगल क्षेत्रों में हैं. वहां घने जंगल और झाड़ियां सुरक्षा के लिहाज से बड़ी चुनौती हैं. इन इलाकों में बांस की घेराबंदी के साथ-साथ अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की जायेगी, ताकि कोई भी व्यक्ति सुरक्षा चक्र तोड़ न सके.
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न खाना, न पानी : चुनाव कर्मियों को सख्त हिदायत
चुनाव आयोग ने निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सेक्टर अधिकारियों और प्रिजाइडिंग ऑफिसर्स को कड़े दिशा-निर्देश दिये हैं. कहा है कि मतदान प्रक्रिया के दौरान चुनावकर्मी किसी भी राजनीतिक दल या उनके एजेंट से किसी भी तरह की मदद नहीं लेंगे. वे किसी भी राजनीतिक प्रतिनिधि द्वारा दिये गये भोजन, पानी या अन्य कोई भी सामग्री स्वीकार न करें. उन्हें प्रशासन की ओर से उपलब्ध करायी गयी सुविधाओं और भोजन पर ही निर्भर रहना होगा.
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पहले चरण की वोटिंग से पहले फुलप्रूफ तैयारी
23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान से पहले आयोग कोई भी कसर नहीं छोड़ना चाहता है. अधिकारियों का मानना है कि बांस की यह अस्थायी घेराबंदी न केवल भीड़ को नियंत्रित करेगी, बल्कि ‘बूथ कैप्चरिंग’ या ‘बोगस वोटिंग’ की कोशिशों पर भी लगाम लगायेगी.
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