थल सेना की पूर्वी कमान ने सैन्य प्रशिक्षण क्षेत्र में भव्य मिलिट्री टैटू का किया आयोजन

विजय दिवस के पूर्व सेना की शक्ति, परंपरा और सांस्कृतिक विविधता की भव्य झलक देखने को मिली

कोलकाता. भारतीय थल सेना के पूर्वी कमान ने 54वें विजय दिवस के उपलक्ष्य में कोलकाता के विजय दुर्ग (फोर्ट विलियम) स्थित मंगल पांडेय सैन्य प्रशिक्षण क्षेत्र में सोमवार एक भव्य सैन्य कार्यक्रम का आयोजन किया. 16 दिसंबर यानी मंगलवार को मनाये जाने वाले विजय दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित इस मिलिट्री टैटू में सेना की शक्ति, परंपरा और सांस्कृतिक विविधता की भव्य झलक देखने को मिली. यह कार्यक्रम आम लोगों के लिए खुला था, जिसमें कोलकाता और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे. इस अवसर पर मिजोरम के राज्यपाल जनरल डॉ वीके सिंह (सेवानिवृत्त) और पश्चिम बंगाल सरकार के युवा एवं खेल, आवास तथा विद्युत मंत्री अरूप विश्वास मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे. उनके साथ सेना ईस्टर्न कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल राम चंदर तिवारी सहित कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, असैनिक अधिकारी और विशिष्ट अतिथि मौजूद थे. कार्यक्रम की शुरुआत सेना के लड़ाकू हेलीकॉप्टरों के शानदार फ्लाई-पास्ट से हुई. इसके बाद सेना के घुड़सवारों द्वारा प्रस्तुत टेंट पेगिंग ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. भारतीय सेना के एविएटर्स ने युद्धाभ्यास से जुड़े कौशल का प्रदर्शन किया, जिसमें ऑपरेशनल सटीकता और युद्धक्षेत्र की फुर्ती साफ नजर आयी. माइक्रोलाइट एयरक्राफ्ट की आकर्षक प्रस्तुति के साथ-साथ स्वार्म ड्रोन और रोबोट म्यूल्स के जरिये आधुनिक सैन्य तकनीक की झलक भी दिखायी गयी. सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समारोह को और भी रंगीन बना दिया. कलारी पयट्टू, भांगड़ा, गतका और जलारी फाटक जैसी पारंपरिक प्रस्तुतियों को दर्शकों ने खूब सराहा. सेना के बैंड द्वारा प्रस्तुत जोशीला सैन्य संगीत भी कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा. इसके अलावा आधुनिक हथियारों, उपकरणों और ड्रोन की प्रदर्शनी के जरिये दर्शकों को अत्याधुनिक सैन्य तकनीकों की जानकारी दी गयी. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जनरल वीके सिंह और लेफ्टिनेंट जनरल राम चंदर तिवारी ने भारत-बांग्लादेश मैत्री पर प्रकाश डाला. उन्होंने पूर्वी पाकिस्तान (मौजूदा बांग्लादेश) में पाकिस्तानी सेना द्वारा बंगालियों पर किये गये अत्याचारों का उल्लेख करते हुए भारतीय सशस्त्र बलों और मुक्ति योद्धाओं के साहस, बलिदान और शौर्य को याद किया. वक्ताओं ने बताया कि किस तरह 1971 के युद्ध में 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों के आत्मसमर्पण के साथ एक स्वतंत्र बांग्लादेश का जन्म हुआ. सेना ईस्टर्न कमांड की ओर से आयोजित यह भव्य समारोह केवल उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय सशस्त्र बलों के अदम्य साहस, बलिदान और भारत-बांग्लादेश की ऐतिहासिक मित्रता को समर्पित एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि रहा. विजय दिवस की विरासत को सम्मान देते हुए यह आयोजन इतिहास, परंपरा और सैन्य उत्कृष्टता के माध्यम से जनता से गहरा भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करने का प्रयास बना.

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Author: GANESH MAHTO

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